बाबा बोले मैं आपके हाथ जोड़ता हूं , पैर पड़ता हूं……!


बैतूल, (रामकिशोर पंवार): योग गुरू बाबा रामदेव पत्रकारो के सवालों के जवाब देते समय इतने ज्यादा परेशान हो गए कि उन्होने एक पत्रकार से कहा कि आप मेरे बुर्जग है मैं आपके हाथ जोड़ता हूं , पैर पड़ता हूं कृपया मुझे माफ करे। पत्रकारो के सवालो से पसीने से तरबतर हो गए बाबा रामदेव यह तक नहीं बता सके कि आखिर क्या वजह हैं कि लोग उनके द्वारा शुरू किए जाने वाले आन्दोलनो को हाईजेक कर लेते हैं। बाबा से जब यह सवाल किया गया कि वे बार – बार स्वीस बैंक के खातो का ही उल्लेख क्यों करते हैं कहीं आप उस बैंक के ब्राड एम्बेशेडर तो नहीं बन गए हैं। पत्रकारो के सवालो से तिलमिला गए योग गुरू बाबा रामदेव ने कहा कि मैं भी आप ही की तरह हूं , मेरी मदद कीजिए दरअसल हुआ यूं कि एक सवाल के जवाब में बाबा ने कहा कि आप मेरे से ऐसे सवाल न करे जैसा पुलिस अपराधी से करते हैं…? बाबा के उक्त जवाब पर दैनिक पंजाब केसरी के बैतूल स्थित संवाददाता ने कहा कि बाबा आप को मीडिया ने कभी अपराधी नहीं कहा यदि आप स्वंय को अपराधी मान रहे हैं तो बात हम क्या करे..? बाबा ने स्वंय को अपराधी मानने के सवाल पर उक्त पत्रकार से हाथ जोड़ कर पैर पडऩे तक की बातें कह डाली। बाबा के उक्त व्यवहार से पूरी मीडिया सकते में आ गई कि आखिर ऐसी क्या वज़ह आ गई कि लाखो लोगो से पैर पड़वाने वाले बाबा को पत्रकार के पैर पडऩे की बातें कहनी पड़ी। पूरा वाक्या कुछ इस प्रकार था कि मीडिया बार – बार दिग्यिविजय सिंह को लेकर बाबा रामदेव से सवाल कर रही थी कि जब सारे कांग्रेसी उनके योग शिविर में आकर उनसे दीक्षा ले रहे हैं तब कांग्रेस महासचिव दिग्यिविजय सिंह कब आपके पास आकर दीक्षा लेगें। बाबा ने उक्त सवाल का जवाब तो नहीं दिया लेकिन दिग्गी राजा की निष्ठा पर ही सवाल उठा दिया। बाबा का कहना था कि सच्चे कांग्रेसी उनकी शरण में आ रहे हैं एक दिन प्रधानमंत्री भी उनकी शरण में होगें। राजीव दीक्षित की मौत एवं साधु संतो की जमात द्वारा उन पर लगाए जा रहे आरोपो को बाबा ने नकारते हुए कहा कि आरोप लगाने वाले सच्चे साधु संत नहीं हैं। बाबा रामदेव ने कहा कि कमलनाथ तक उनके शिविर में उपस्थित रहेगें लेकिन दिग्गी राजा के सवाल को एक बार यह कह कर टाल दिया कि मैं उसकी बात नहीं करना चाहता हूं। बाबा रामदेव ने यह तक नहीं बताया कि लोकपाल बिल के मसोदे पर उनके मतभेद अभी भी जारी हैं या नहीं लेकिन बाबा ने विश्वास दिलाया कि उनके 4 जून के कार्यक्रम में अन्ना हजारे जरूर रहेगें। बैतूल जिले में पहली बार आए बाबा रामदेव यह तक नहीं बता सके कि यदि वे चाणक्य हैं तो चन्द्रगुप्त मौर्य शिवराज सिंह है या फिर नरेन्द्र मोदी..? योग गुरू बाबा रामदेव ने अपने भक्तो से कहा कि मैं 4 जून को नई दिल्ली में एक लाख लोगो के साथ काले धन को लेकर सत्याग्रह करने जा रहा हूं आप सभी जिला स्तर पर सत्याग्रह करे। बाबा रामदेव ने कहा कि विदेशी बैंको में पड़ा कालाधन स्वदेश वापस आ जाता हैं तो देश की आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता हैं। योग गुरू बाबा रामदेव की सभा में पूरे जिले से लगभग पांच हजार लोगो की भीड़ एकत्र हुई थी। बाबा के कार्यक्रम के दौरान बाबा के साथ आए वाहनो में लाई गई सामग्री की बिक्री जमकर हुई। बाबा रामदेव सारनी होते हुए कल छिंदवाड़ा में योग शिविर एवं जनजागरण सभा का आयोजन करेगें।

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भगवा सरकार में नारी और नदी के साथ भेदभाव की सबसे ताजी कहानी

भगवा सरकार में नारी और नदी के साथ भेदभाव की सबसे ताजी कहानी
गिरगीट की तरह रंग बदलती जिला पंचायत और उसकी जलाभिषेक परियोजना
बैतूल, रामकिशोर पंवार: गिरगीट की तरह रंग बदलती जिला पंचायत और उसकी तथाकथित जलाभिषेक परियोजानाओं के चलते बैतूल जिले में जल ससंद मजाक बन कर रह गई हैं। पहले बैतूल जिला पंचायत के बैनर तले मुलताई जनपद एवं विकासखण्ड की ग्राम पंचायत गौला ग्राम में ताप्ती के पुनर्जीवन परियोजना के नाम  पर एक कार्यक्रम हुआ जिसमें बैतूल जिला कलैक्टर  एवं जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति लता राजू ने भाग लिया। ताप्ती को पुनर्जीवन देने के लिए 292.121 लाख रूपए की एक अति महत्वाकांक्षी परियोजना बनाई गई। सूर्यपुत्री मां ताप्ती नदी के पुनर्जीवन को लेकर आयोजित उस कार्यक्रम को बमुश्कील साल भर भी नहीं हुआ कि उक्त परियोजना अचानक ठंडे बस्ते में जा पहुंची। उक्त परियोजना की छाती पर दुसरी मां चन्द्रपुत्री नदी पूर्णा के पुनर्जीवन की 451.506 लाख रूपए से संपादित होनी परियोजना की तथाकथित आत्मकथा लिखनी शुरू कर दी गई। इसे महज संयोग ही माना जाए कि बैतूल जिले में एक छोर मुलताई एवं दुसरे छोर भैसदेही के नगरीय क्षेत्रो के दो – अलग – अलग तालाबों से निकलने वाली दो पुण्य सलिला ताप्ती एवं पूर्णा का बहाव क्षेत्र सबसे अधिक बैतूल जिले में ही हैं। अपनी जन्मस्थली से सीमावर्ती जिले की सीमा तक इन नदियों को पुनर्जीवन देने के लिए दो अलग – अलग महत्वाकांक्षी परियोजना का दो अलग – अलग जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की मौजूदगी में श्री गणेश तो हुआ लेकिन ताप्ती परियोजना दो कदम भी चल नहीं पाई और रास्ते में ही दम तोड़ गई। इस बार जिला प्रभारी मंत्री सरताज सिंह की 2011-12 में जल अभिषेक अभियान के शुभारम्भ किया गया। ”समेकित माईक्रोप्रोजेक्टÓÓ, परियोजना अधिकारी, आर.जी.एम.डब्ल्यू.एम., पार्टनर एन.जी.ओ. की साझा पहल पर जल अभिषेक अभियान वर्ष 2010-11 के तहत ”जनसहभागिता को प्रोत्साहित करनेÓÓ के लिए जहां वातावरण निर्माण,  ग्रामीणों में पानी की कमी और इसके संरक्षण के प्रति अहसास जागृत करने तथा व सामाजिक जुड़ाव के कार्यकलाप जैसे पीढ़ी जल संवाद, जल यात्रायें, जल गोष्ठी, ”चिन्हित गतिविधियों के सघन कार्यान्वयनÓÓ नदी पुनर्जीवन परियोजना अन्तर्गत प्रगति, भागीरथ कृषकों द्वारा निजी खेतों पर सिंचाई तालाबों का निर्माण और पुरानी जल संग्रहण संरचनाओं के सुधार / जीर्णोद्धार के क्रियान्वित कार्यों को शामिल किया गया। विगत वर्ष राशि रू. 464.51 लाख की लागत से 942 पुरानी जल संग्रहण संरचानाओं की मरम्मत अथवा पुनरोद्धार किया गया है। राशि रू. 451.506 लाख से पूर्णा नदी पुनर्जीवन हेतु चयनित कार्य क्रियान्वित किये गये है। बैतूल जिले के कमाऊपूत अधिकारियों को ताप्ती के लिए स्वीकृत राशि रू. 292.121 लाख रूपए की राशी से पूर्णा के लिए स्वीकृत 451.506 लाख रूपए की परियोजना में जस्त दुगनी लागत में कमाई का ज्यादा सुअवसर मिलने के चलते उन्होने ताप्ती को भगवान भरोसे छोड़ कर वे पूर्णा गाथा लिखने में जूट गए। बैतूल जिले में जलाभिषेक अभियान के लिए 2082.22 लाख रूपए की राशी का बजट अनुमोदन स्वीकृत होकर आने के बाद जल अभिषेक अभियान के अन्तर्गत उक्त कार्यों के अतिरिक्त अन्य समस्त ग्रामों में जल संरक्षण एवं संवर्धन हेतु कार्य संपादित किया जाना हैं। वैसे तो जिले में 3189.358 लाख रूपए की लागत से जिले में जल अभिषेक अभियान के तहत विभिन्न कार्य कराये जा चुके है। जल अभिषेक अभियान 2011-12 के सफल आयोजन हेतु एम.एस.पावर-पाईन्ट प्रस्तुति के माध्यम से शासन के समस्त निर्देशों, चयनित गतिविधियों एवं आगामी प्रस्तावित कार्ययोजना का प्रस्तुतिकरण किया गया। पार्टनर एन.जी. ओ. द्वारा चयनित क्षेत्र मे ली जाने वाली गतिविधियों एवं विगत वर्ष में क्रियान्वित गतिविधियों पर बैठक में जानकारी दी गई एवं वर्ष भर जल अभिषेक अभियान का कार्यान्वयन जारी रखने सर्व सम्बंधित को निर्देश जारी दिये गये। बीती 22 अप्रेल 2011 को भैंसदेही जनपद पंचायत के ग्राम रामघाटी में जलाभिषेक अभियान के तहत जिला स्तरीय कार्यक्रम ”जिला जल संसदÓÓ का श्री सरताजसिंह, वन मंर्ती, मध्यप्रदेश शासन एवं प्रभारी मंत्री, जिला बैतूल के मुख्य आतिथ्य में आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रीमती ज्योति बेवा प्रेम धुर्वे क्षेत्रीय सांसद द्वारा ”जिला जल संसदÓÓ की अध्यक्षता की गई। ग्राम रामघाटी पूर्णा नदी पुनर्जीवन परियोजना के जलग्रहण क्षेत्र (केचमेन्ट एरिया) स्थित है। ग्राम रामघाटी एवं ग्राम गारपठार में लागत 27.41 लाख की लागत के 6 नवीन लघु तालाब का विधिवत भूमि पूजन एवं जल संसाधन विभाग द्वारा लागत 35 लाख से निर्मित रामघाटी स्टापडेम का लोकापर्ण किया गया। कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन द्वारा पूर्णा नदी जलग्रहण क्षेत्र में स्थित ग्राम कोढिय़ा में लागत 519.27 लाख से मध्यम तालाब स्वीकृति किया जा चुका है। ”समेकित माईक्रोप्रोजेक्ट के तहत जनपद पंचायत भैसदेही में पूर्णा नदी पुनर्जीवन परियोजना में 3 क्लस्टर का चयन किया जाकर 64.01 करोड़ की कार्ययोजना तैयार की गई है। उक्त कार्ययोजना का क्रियान्वयन 31 मार्च 2013 तक पूर्ण किया जाना है। जहां एक ओर यह तर्क दिया जा रहा हैं कि नदी पुनर्जीवन हेतु पूर्णा नदी को सिर्फ इसलिए चयनीत किया गया क्योकि नदी का जलग्रहण क्षेत्र की जल रिसन क्षमता अधिक है, नदी में जहां पहले वर्ष भर पानी रहता था, अब वहां नदी नवम्बर माह में ही सूख जाती है, पूर्णा आदिवासी विकासखण्ड के भैसदेही नगर सहित 52 ग्रामों की जीवनदायिनी है एवं चयनित क्षेत्र के ग्रामीण जनसहभागिता के लिये सहर्ष तैयार है। पूर्णा नदी जिले के भैसदेही के पोखरनी ग्राम में स्थित काशी तालाब से प्रारम्भ होकर ग्राम चांगदेव जिला जलगांव महाराष्ट्र में ताप्ती में समाहित हो जाती है। नदी की कुल लम्बाई 170 कि.मी. है। नदी का जलग्रहण क्षेत्र 7,50,000 हेक्टेयर है। जिले में नदी की कुल लंबाई 89.602 कि.मी. एवं कुल जलग्रहण क्षेत्र 36242.349 हेक्टेयर है जिसमे से उपचार हेतु चयनित नदी की 45.855 कि.मी. लंबाई अन्तर्गत 13 ग्राम पंचायतों के 28 ग्राम का कुल 17840ण्165 हेक्टेयर क्षेत्रफल उपचार हेतु चयनित किया गया है।पूर्णा नदी पुनर्जीवन परियोजना के तहत 28 ग्रामों की 35007 जल संख्या सीधे तोर पर लाभान्वित होगी साथ ही 3746 लघु एवं सीमान्त कृषको को अपनी फसल की सिंचाई हेतु र्प्यापत जल उपलब्ध हो सकेगा। सम्पूर्ण परियोजना की लागत 64.01 करोड़ है जिसमें से 36.00 करोड़ जिला स्तर पर संचालित विभिन्न विभागीय योजनाओं के माध्यम से जुटाया जायेगा शेष राशि 28 करोड़ की स्वीकृति राज्य शासन से अपेक्षित है। कार्ययोजना क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग, अजाक विभाग, आई.टी.डी.पी., बी.आर.जी.एफ., जनभागीदारी, आर.जी.एम.वाटरषेड, पी.एच.ई., सांसद/ विधायक निधि आदि मद से कार्य किया जाना प्रस्तावित है। वही दुसरी ओर ताप्ती नदी के बारे में प्रस्तावित परियोजना के बंद होने की कहानी कुछ हजम नहीं हो रही हैं। मुलताई से लेकर सूरत तक ताप्ती नदी 750 किलोमीटर बहती हैं जिसमें सबसे अधिक जल प्रवाह क्षेत्र बैतूल जिले में ही हैं। लगभग 250 किलोमीटर के क्षेत्र में 25 स्टाप डेम बनने थे लेकिन ताप्ती नदी में नदी का बहाव तेज होने के कारण घटिया निमार्ण कार्य की पोल खुल जाती तथा नदी में लगभग ढाई सौ से अधिक ऐसे प्राकृतिक जल संग्रहण क्षेत्र हैं जहां पर बारह मास पानी भरपूर रहता हैं। जिले में मुलताई में ताप्ती में जल का प्रवाह भले ही ऊपरी सतह पर कम हो जाता हैं लेकिन नदी अंदर ही अंदर बहती रहती हैं।
पूर्णा नदी पुनर्जीवन परियोजना में कन्टूर टेऊन्च, कन्टूर बोल्डरवाल, गली प्लग, मेढ़ बंधान, खेत तालाब, बलराम तालाब, स्टाप डेम, तालाब, परकोलेषन टैंक, बोरी बंधान, नाला बंधान, कूप डाईक, रिचार्ज साफ्ट, पुरानी संरचनाओं का सुधार आदि जल सरंक्षण संरचनाओं को  प्रमुखता से लिया गया है। समेकित माईक्रो प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2010-11 की स्थिति तक 451.38 लाख के कार्य क्रियान्वित किये गये हैं। पूर्णा नदी का पुर्नजीवित करने हेतु कार्य योजना तथा कार्यों की प्रगति तो आने वाले कल में दिखाई देगी लेकिन ताप्ती के साथ प्रदेश सरकार के साथ – साथ जिला सरकार की सोच ने आज फिर सवाल उठा कर रचा दिए हैं कि क्या प्रदेश की भाजपा सरकार ताप्ती से बैर रखती हैं। सवाल यह उठता हैं कि पूर्णा नदी पुनर्जीवन हेतु तन-मन-धन से समर्पण की बाते कहने वाले जनप्रतिनिधि ताप्ती की लागतार उपेक्षा के लिए आखिर क्यों गुंगे और बहरे बने हुए हैं। जिले में पूर्णा नदी की कुल लंबाई 89.602 कि.मी. एवं कुल जलग्रहण क्षेत्र 36242.349 हेक्टेयर है जिसमे से उपचार हेतु चयनित नदी की 45. 855 कि.मी. लंबाई अन्तर्गत 13 ग्राम पंचायतों के 28 ग्राम का कुल 17840.165 हेक्टेयर क्षेत्रफल उपचार हेतु चयनित किया गया है। पूर्णा नदी पुनर्जीवन परियोजना के तहत 28 ग्रामों की 35007 जल संख्या सीधे तोर पर लाभान्वित होगी साथ ही 3746 लघु एवं सीमान्त कृषको को अपनी फसल की सिंचाई हेतु र्प्यापत जल उपलब्ध हो सकेगा। सम्पूर्ण परियोजना की लागत 64.01 करोड़ है जिसमें से 36.00 करोड़ जिला स्तर पर संचालित विभिन्न विभागीय योजनाओं के माध्यम से जुटाया जायेगा शेष राशि 28 करोड़ की स्वीकृति राज्य शासन से अपेक्षित है। कार्ययोजना क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग, अजाक विभाग, आई.टी.डी.पी., बी.आर.जी.एफ., जनभागीदारी, आर.जी.एम.वाटरषेड, पी.एच.ई., सांसद/ विधायक निधि आदि मद से कार्य किया जाना प्रस्तावित है। पूर्णा नदी पुनर्जीवन परियोजना में कन्टूर टेऊन्च, कन्टूर बोल्डरवाल, गली प्लग, मेढ़ बंधान, खेत तालाब, बलराम तालाब, स्टाप डेम, तालाब, परकोलेषन टैंक, बोरी बंधान, नाला बंधान, कूप डाईक, रिचार्ज साफ्ट, पुरानी संरचनाओं का सुधार आदि जल सरंक्षण संरचनाओं को  प्रमुखता से लिया गया है। ताप्ती नदी पर पहले छोटे रपटे डेम , स्टाप डेम एवं अन्य माध्यमो से जल संग्रहण की लम्बी चौड़ी  बाते कहीं गई थी। उस समय तो ऐसे प्रचार किया गया था कि भागीरथ तो गंगा को अपने कुल का उद्धार के लिए लाए थे लेकिन अब लग रहा हैं कि कलयुगी भागीरथा को आदिगंगा मां सूर्यपुत्री के नाम पर स्वीकृत 292.121 लाख रूपए की राशी में स्वंय के उद्धार की कोई गुंजाइश नहीं दिखाई दी तो उन्होने इस आदिगंगा की ओर दुबारा मुड़ कर भी नहीं देखा। इन सबसे अलग विधि का विधान कहे या फिर कोई चमत्कार मई माह की इस तपती धुप में भी ताप्ती आज भी कल कल कर बहती हुई चली जा रही हैं। जिस गंगा को पूरे साल का बोझ पाप को लेकर साल में एक बार मां नर्मदा के पास आना पड़ता हैं आज वहीं नर्मदा भी गंगा के बोझ के तले दबती चल जा रही हैं। आज गंगा की तरह नर्मदा भी मैली हो गई हैं लेकिन ताप्ती न तो किसी के पास जाती हैं और न किसी के पाप का बोझ ढोती हैं। गंगा में लोगो को मुक्ति मिलती है या भी नहीं यह तो राम ही जाने लेकिन ताप्ती में तीन दिन आज भी मानव अस्थियां गल जाती हैं। युगो से ताप्ती नदी में गंगा की तरह स्नान और नर्मदा के दर्शन के समकक्ष पुण्य उसके नाम मात्र के स्मरण से ही मिलता चला आ रहा हैं। ऐसे में प्रदेश की भाजपा सरकार नदी और नारी में भेदभाव करके अपनी ओझी एवं घटिया मानसिकता का परिचय दे रही हैं।


बैतूल , रामकिशोर पंवार: राजकपूर ने अपने बेटे राजीव कपूर को प्रमोट करने के लिए एक फिल्म बनाई थी राम मेरी गंगा मैली  फिल्म तो चली नहीं पर उसके बोल्ड सीन को देख कर लोग फिल्म देखने आ जाते थे। फिल्म की तरह बैतूल में एक गंगा के मैली होने की खबरे कई बार लोगो को बताई गई लेकिन लोग कान से बहरे और आंख से अंधे हो गए। जब बैतूल नगर पालिका अध्यक्ष डां. राजेन्द्र देशमुख होटल जायका में अपनी एक साल की उपलब्धि गिना रहे थे तब बैतूल जिला पर्यावरण संरक्षण समिति की ओर से माचना नदी के मैली होने की बाते तथ्यों के आधार पर रखी गई जिस पर पालिका अध्यक्ष का दो टुक जवाब था कि यह काम हमारा नहीं है..? आज उसी माचना नदी के मैली होने को लेकर बैतूल के जनप्रतिनिधियों के हवाले से हाय: तौबा मचाई जा रही हैं। बासी खबरो को अपने पाठको को परोसने का नदियों को लेकर चिंताग्रसित राजस्थान पत्रिका के प्रकाशक एवं संपादक गुलाब कोठारी के पेड संवाददाताओं ने बीड़ा उठा लिया हैं। जब नदी को प्रदुषित किया जा रहा था उस समय पालिका अध्यक्ष की चाटुकारिता में लगी पत्रिका की पूरी टीम माचना को लेकर लीड न्यूज बना कर पाठको को परोस रही हैं आखिर क्यों…? आमला विकासखंड के ग्राम हसलपुर से निकलकर करीब 70 किमी का सफर तय करने के बाद माचना नदी शाहपुर के आगे तवा नदी में मिलती हैं। इस 70 किमी के सफर में माचना नदी की सबसे ज्यादा दुर्गति बैतूल शहर की सीमा के अंदर ही होती है। जहां बैतूल के रहवासी अपनी इस नदी से प्यास तो बुझाते है लेकिन उन्होने कभी यह सोचने की परवाह तक नहीं की कि जिस नदी का पानी पी रहे है वह दरअसल में नाक मापदण्डो पर कितनी प्रतिशत शुद्ध हैं। बैतूल के 89 प्रतिशत टुयूबवेल फलोराइड वाला पानी ऊगल रहे है उसके बाद भी नगर पालिका द्वारा सप्लाई किया जाने वाला माचना नदी का पानी भी भी कम प्रदुषित नहीं हैं। नदी और नारी के प्रति संवेदनशील समाज के चलते आज माचना पूरी तरह से मैली ही नहीं जहरीली भी हो गई हैं। माचना नदी में एनीकेट के पहले एवं बाद लगातार माचना का मैलापन किसी से छुपा नहीं हैं। जिंदा तो दूर मरे हुए इंसान की अंतिम क्रपाल क्रिया में भी माचना का प्रदुषित जहरीला पानी उपयोग में लाया जा रहा हैं। माचना एनीकेट से लेकर परतवाड़ा रोड़ स्थित कर्बला तक पांच किमी के दायरे में माचना ने हरे रंग की काई से बुनी गई चादर ओढ़ रखी है हालाकि हर वर्ष माचना जन्मोउत्सव पर उसे लाल रंग की चुनर पहनाने का रिवाज हैं। अब तो माचना का पानी दिन प्रतिदिन सुखता जा रहा है जिसके चलते काई अब जमीन पर ही बिछौना बनती जा रही हैं। ऐसा होने से बीते तीन महिने से माचना नदी का जल प्रवाह थम सा गया है। हालत यह है कि इसका पानी मवेशी भी पीना पसंद नहीं करते हैं। माचना नदी में जाकर मिलने वाले शहर के हाथी नाले के माध्यम से शहर के घरों के गटर का पानी भी सीधे जाकर माचना में मिल रहा है। इसके अलावा माचना के किनारे बसे वार्डो से भी जो गंदा पानी है उसकी निकासी भी माचना नदी में ही की जाती है। कूड़ा-करकट भी माचना में ही समाहित होता है। जिस तरह मुलताई में ताप्ती जयंती, भैंसदेही में पूर्णा जयंती और शाहपुर में माचना जयंती मनाई जाती है उस तरह बैतूल में माचना को लेकर कोई जागरूकता आम नागरिकों में नहीं है उसके पीछे वजह यह है कि जो मैली हो चुकी है उसे पवित्र कैसी मानी जाए….? जलाभिषेक अभियान में नदियों के संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े प्लान बनाए जा रहे हैं लेकिन जिला मुख्यालय पर मौजूद इस बड़ी नदी के संरक्षण और संवर्घन के लिए जिला प्रशासन के पास प्लान होना तो दूर की बात है कोई विचार तक नहीं है। एनीकेट से लेकर कर्बला तक माचना नदी के किनारे तीन श्मशान घाट है और तीनों ही घाटों पर शव जलाने के बाद निकलने वाली क्विंटलों राख माचना में ही प्रवाहित कर दी जाती है। इस राख की वजह से माचना का पानी सबसे ज्यादा प्रदूषित होता है और इसी राख की वजह से एनीकेट के बाद माचना के पानी का उपयोग अन्य दैनिक कार्यो में करने में लोग कतराते हैं। यह माचना की सबसे बड़ी विडंबना है कि आधे शहर की प्यास एनीकेट के माध्यम से बुझाने के बाद भी इसके पानी से ही यह बैतूल शहर परहेज करता है। वैसे माचना नदी नगरीय क्षेत्र की सीमा में आती है इसलिए इसकी साफ-सफाई और संरक्षण की जिम्मेदारी नगरपालिका की है।

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‘आखिर कहां खो गये अलगू चौधरी और जुम्मन शेख ..!”


रामकिशोर पंवार ”रोंढ़ावाला ”
हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक स्वर्गीय मुंशी प्रेमचंद की एक कथा ”पंच परमेश्वर” और ”बुढ़ी काकी”  मैने बचपन में कक्षा तीसरी में पढ़ी थी। उस समय की कथा के पात्रो को लेकर व्यक्त की गई कथाकार की प्रस्तुति तो लगभग भूल गया लेकिन याद रह गये अलगू चौधरी और जुम्मन शेख और बुढ़ी काकी जिसे मैं भारत के उन गांवो में खोजता चला आ रहा हँू जो कि पंचायती राज्य के चक्कर में कहीं उन पात्रो का कफन – दफन कर चुके है। मेरा गांव में ही मैं आज भी जुम्मन शेख को खोज रहा हँू लेकिन लगभग आधा सैकड़ा होने को आई इस उम्र में भी मुझे जुम्मन शेख नहीं मिला। मेरे गांव में अलगू चौधरी की जगह केशो चौधरी और उसके बाद ढिल्लन चौधरी तो मिल गये लेकिन पंच परमेश्वर के कहीं दर्शन तक नहीं हो रहे है। गांव की चौपाल भी टूट चुकी है। अब पंच परमेश्वर गांव की चौपाल पर नहीं एक बंद कमरे में कुर्सी पर बैठ कर गुपचुप फैसला करने लगे है। पहले गांव के पंच परमेश्वर का फैसला सर्वमान्य था लेकिन अब तो फैसला लेने के पहले और बाद में भी सिर्फ हंगामा होने लगा है। गांव के पंच और परमेश्वर दोनो ही लापतागंज की तरह लापता हो चुके है जिसके चलते गांव के फैसले गांव में तय होने के बजाय अब कोर्ट – कचहरी तक जाने लगे है। सर्वोदयी गांव में जगह संत टुकड़ो जी महाराज के सुखद सपने का सुर्यास्त हो चुका है। अब तो गांव में चिडिय़ो की चहचहाट भी मोबाइल टावर के नेटवर्क की तरह कभी – कभी धड़ – पकड़ करती सुनने को मिल जाती है। पूरी तरह गांवो की गायब पगडंडियो की जगह सीमेंट काक्रिंट होने लगी गलियो में अब गांव का पंचायती राज कमाऊपूत बेटा बन गया है जिसका जिसने भी नमक खाया वह या तो नालायक निकल गया या फिर नमक हराम …….. ऐसे में गांवो के सर्वागिण विकास का सुखद सपना बापू के आजाद भारत के सुर्योदय के साथ ही न जाने कब अस्त हो गया। भगवा सरकार के भगवा रंगीन माहौल में मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले के गांवो में पंचायती राज की बाते जोर – शोर के साथ कहीं एवं सुनी जाती है। प्रदेश के मुखिया शिवराज के स्वराज और सुराज के साथ ग्रामराज में एक बार फिर गांवो के विवादो के निपटारे के लिए ग्राम न्यायालय की भी सुखद परिकल्पना की जा रही है। ऐसे में क्या गांव की खाला को सहीं न्याय दिलवाने में अलगू चौधरी अव्वल नम्बर पर रहेगा या फिर वह भी मौजूदा हाल का शिकार बन जायेगा। जिस प्रदेश के गांवो में जाबकार्ड पर जब बेरोजगारो को ठीक ढंग से सौ दिन का रोजगार तथा राशन की दुकान पर घर के दीये के लिए मिटटी का तेल तक नहीं मिल पाता वहां पर जुम्मन शेख से पंच परमेश्वर बनने के बाद सही न्याय मिलने की संभावनायें कहीं से कहीं तक नज़र नहीं आती है। आज गांव का अलगू चौधरी और जुम्मन शेख पंच बनने के लिए हजारो रूपैया पानी की तरह बहा कर चुनाव जीत जाते है ऐसे में उनसे जनसेवा – परोपकार की अपेक्षा रखना अपने आप को धोखा देना जैसा संगीन अपराध कहलायेगा। पंच के चुनाव में जब हजारो से लेकर लाखो तक खर्च होने लगे है तब गांव की सड़के और नालिया सब कुछ पंच की मनमर्जी के मुताबिक ही होगा अन्यथा सरपंच के खिलाफ जनसुनवाई से लेकर कोर्ट कचहरी तक के लिए दरवाजे खुले रहते है। गांवो से आज भी सरपंच एवं सचिवो तथा पंचो के खिलाफ शिकवा – शिकायतो का दौर नहीं थमा है। अब तो पूरा गांव ही अलगू चौधरी एवं जुम्मन शेख की साझेदारी – भागेदारी के खिलाफ आवाज उठाने लगे है। बैतूल जिले में 558 ग्राम पंचायतो के हजारो पंचो एवं सरपंचो तथा सचिवो की तथाकथित यूनियने – संगठन रोज किसी न किसी के पक्ष में ज्ञापन और विज्ञापन देते पूरे जिले में कहीं न कहीं अपनी ताकत दिखाते नज़र आ जायेगें। अब तो ऐसा लगने लगा है कि गांवो में केवल नेतागिरी की आड़ में अपने पापो को छुपाने का वही काम किया जा रहा है जो गांव की दाई पेट का पाप छुपाने का करती थी। गांव तो आज के समय में शीला की जवानी और टकसाल बनी मुन्नी की तरह बदनाम होने लगे है। ऐसे में गांवो के सर्वागिण विकास का स्वर्गीय मुन्नी भैया – बाबू जी का सपना पता नहीं कब साकार होगा। गांवो में कांग्रेस और भाजपा का राज नहीं है बल्कि राज है उन लोगो का जो कि सरकारी माल को हज़म करने में महारथ हासिल किये हुये है। मेरा जन्म भी एक छोटे से गांव में हुआ है। गांव से मेरी आत्मीयता के पीछे मेरा गांव में गड़ा नरा है जिसे आज के शहरी लोग समझ नहीं पाते है। दरअसल में नरा का मतलब वह नली से जिससे गर्भवति के पेट में पल रहे शीशु को आहार मिलता है। बच्चे के जन्म लेने के बाद गांव की दाई और शहर की नर्स उस नली को काट कर फेक देती है। गांवो में दाई उस नी को काट कर जमीन में गाड़ देती है। ऐसे में गांव से उन लोगो का लगाव जुड़ जाता है जिनका उस गांव में नरा गड़ा होता है। अकसर गांव के बुर्जग लोगो को ताना मारते समय यह कहते जरूर सुना होगा कि ” क्यों तेरा यहां पर नरा गड़ा है क्या…..?  अकसर लोग गांव को छोड़ कर शहरी चकाचौंध में खोते जा रहे है। ऐसे में मुंशी प्रेमचंद की बुढ़ी काकी और पंच परमेश्वर आपको कहीं भी ढुढऩे से नहीं मिलने वाले है। आज जरूरत है कि हम भले ही शहर में रहे लेकिन ऐसा वातावरण पैदा करे कि हर मोहल्ले में एक अलगू चौधरी और जुम्मन शेख हो जिसकी बाते सभी परमेश्वर की बात समझ कर माने ताकि शहरो में भी शांती कायम रहे है और लोगो का मानसिक तनाव कम हो सके। स्वर्गीय मुंशी प्रेमचंद को समर्पित यह लेख शायद कुछ लोगो को जरूर पसंद आयेगा।

धर्म संस्कृति
सूर्यपुत्री माँ ताप्ती की घाटियो में छुपी प्राचिन
सभ्यताओं का प्रतीक है ग्राम डोहलन
रिर्पोट :- रामकिशोर पंवार
मुलताई (बैतूल)। विश्व पटल पर देखने से पता चलता है कि अनेक सभ्याताओं का उदय और विनाश नदियों के किनारे हुआ है। विश्व की अनेक प्राचिन सभ्यता चाहे सिंधु घटी की सभ्यता हो या फिर किसी अन्य की प्राचिन सभ्यता इन सब की पोषक नदियाँ रही है। नदियो के किनारे जन्मी अनेक सभ्यताओं से जुड़े किस्से कहानियों में भारत की सबसे प्राचिन नदी सूर्य पुत्री माँ ताप्ती का भी नाम आता है। आज यही कारण है कि ताप्ती तटों पर प्राचीन समृद्ध सभ्यताओं के अवशेष अकसर बिना किसी खुदाई या खोज के अकसर लोगो का मिलते है। वास्तुकला के अमुल्य खजानों से ओत- प्रोत सूर्यपुत्री माँ ताप्ती के तटो पर मिलने वाले प्राचिन मठ – मंदिर एवं अवशेषो को देखते ही उसके प्राचिन इतिहास की फिलम इआँखो के सामने चलने लगती है। भारतीय पौराणिक एवं प्राचीन संस्कृति की अमोल धरोहर कही जाने वाली वास्तुकला एवं शिल्प कला की बेजोड़ मिशालें कहलाने वाली इन अद्धितीय कला कृतियों के निमार्ण के साथ – साथ इनके आज तक नष्ट न हुये सौंदर्य को देखते ही इस बात का अंदाजा उन अमीट साक्ष्यो से लगाया जा सकता है सदियों के बाद भी इन कला कृतियों का वैभव पूर्ण रूप से नष्ट होने की कगार पर आ जाने के बाद भी ए आज भी ज्यो – के त्यो खड़े अपने इतिहास के पन्नो में छपी कहानी – किस्सो को बयाँ करते है। कई बार समाचार पत्रो एवं जागरूक संगठनो की उलाहना के बाद हाल हीं में मध्य प्रदेश सरकार के पुरातत्व विभाग ने इनकी सुध लेने की दिशा में पहल करने का मन बनाया। वह इन प्राचिन भारत की अनमोल धरोहर की सुध लेने एवं इन्हें सहजने के लिए भोपाल से आदिवाससी बैतूल जिले की ओर निकल पड़ा है। भोपाल – नागपुर नेशनल हाइवे 69 पर स्थित बैतूल जिले की मुलताई तहसील मुख्यालय के दक्षिण में लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम डोहलन में स्थित प्राचीन ऋषि महाराज के मंदिर माता माई मंदिर का जीर्णोद्वार की सुगबगाहट में जुटा मध्यप्रदेश सरकार का पुरात्व महकमा ने इस गांव पहँुचने के बाद कुछ सार्थक कार्य प्रारंभ किया है। पुरातत्व विभाग द्वारा धार्मिक आस्था के प्रतीक और प्राचीन वास्तुकला की धरोहर को सहजनें का प्रयास किया जा रहा है। ऋषि महाराज का मंदिर अत्यंत प्राचीन है और मंदिर के चारों और पत्थर पर बनी कलाकृतियों आज भी सहज ही मन मोह लेती है। इस मंदिर पर दत्तात्र भगवान राम नटराज और मॉ काली की पत्थर की बनी प्रतिमाएॅ है साथ ही अनेक कलाकृतियों में युद्ध का वृतांत एवं नृत्य के भाव-भगीमा को दिखाया गया है। वहीं माता माई के मंदिर के समक्ष लगा द्वार पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियों का बेजोड़ नमूना है इस कलाकृती को देखकर प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति की समृद्धि का भान होता है। ग्राम डोहलन में जगह-जगह बिखरी पड़ी कलाकृतियों के रूप में सौंदर्य की प्रतिमाएॅं उत्कृष्ट कल्पनाओं का ऐसा संसार दिखाती है जिसे देख सहज ही मन विभोर हो जाता है। इस प्राचीन मंदिर को लेकर अनेक किस्से, कहानी और दंत कथाएॅं प्रचलित है।  ग्राम में जब भी कोई आपदा आती है तो ग्रामीण इस मंदिर में शरण लेते है और भक्ति भाव से की गई प्रार्थना के बाद लोगों का यह विश्वास है कि सभी आपदाएॅं टल जाती है। ग्रामिणो की आस्थायें कहती है कि गांव में चाहें कोई भी बीमारी का प्रकोप हो या अवर्षा की समस्या, ग्रामीण अपनी सभी समस्याओं का हल इसी मंदिर में खोजते है, लोगों का विश्वास है कि वर्षा ने होने पर ताप्ती का जल इस मंदिर में चढ़ाने से वर्षा हो जाती है। डोलहन ग्राम के लोगो की ऐसी मान्यता है कि इस गांव के प्राचिन इन मंदिरो का रिश्ता भगवान मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम के वनवास काल से जुडा है। इस गांव के मंदिर के प्राचीन इतिहास पर प्रकाश डालते हुए ग्रामिण बताते है कि यह मुनि विश्राम एवं रमण मुनि की तपों भूमि रही है। यहॉं मुनि मंदिर में विद्यमान शिव लिंग की पुजा किया करते थें, राजस्थान से आए उनके कुल भाटों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास आठ सौ सालों से भी अधिक पुराना है इस मंदिर से कभी कलांतर में पत्थरों की ही एक सीढ़ी हुआ करती थी, जो कि ताप्ती नदी के मध्य तक जाती थी, जिसके अवशेष आज भी ताप्ती तट पर देखे जा सकते है। ग्राम डोहलन वासियों का मानना है कि प्राचीन काल में यहाँ विशाल मंदिर रहा होगा। अनेक ग्रामीण कहते है वर्तमान में जो मंदिर दिखाई देता है इसके निचले भाग में विशाल मंदिर हो सकता है। जगह-जगह खड़े पत्थरों के आकर्षक खंबे इस विश्वास को पुख्ता करते है। ताप्ती नदी के मध्य बना चबूतरा सीढिय़ों के अवशेष एवं बावड़ी का अस्तित्व यह बताता है कि यहाँ कभी समृद्ध सभ्यता रही है, जिसें खोजे जाने की आवश्यक्ता है। बैतूल जिलें में पहली बार पुरातत्व विभाग भोपाल द्वारा प्राचीन संस्कृति की धरोहर का प्रयास किया जा रहा है। ऋषि महाराज मंदिर के चारों ओर पत्थरों का परकोटा बनाया जा रहा है। बेश किमती कलाकृतियों को सहज कर उचित स्थान पर लगाया जा रहें है। पुरातत्व विभाग से जुड़े लोगो का मानना है कि इस स्थान को संग्रहित एवं सुरक्षित रखने की ठोस कार्य योजना है, जिसका शीघ्र ही उदय होगा। फि लहाल पत्थरों का प्लेट-फार्म बनाया जा रहा है, एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक पत्थरों का ही मार्ग निर्माण किया जा रहा है।
बैतूल जिले के इतिहास के बारे में जिले की आधी से ज्यादा आबादी को पता नहीं है कि जिले का सबंध किस युग- काल – समय से कब – कब रहा है। जिले में घटित मान्यताओं को लेकर कुछ जानकार एवं इतिहासकार तथा पुरात्तव विभाग के विशेषज्ञ अब इस बात पर भी चिंतन मनन करने में जुट गये है कि मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले का प्राचिन एवं पुरात्तव तथा पौराणिक इतिहास क्या है। बैतूल जिले के काफी प्राचिन इतिहास से सूर्यवंश का रिश्ता भी किस तरह जुडा हुआ है। बैतूल जिले में बहने वाली ताप्ती नदी जिसे आदिगंगा – भद्रा – तापी – तपती – तापती सहित दर्जनो नामो से पुकारा जाता है उसका जन्म स्थान मुलतापी  – मुलताई बैतूल जिले में ही स्थित है। जिले का प्राचिन इतिहास बताने के लिए हम कुछ प्रमाण प्रस्तुत कर रहे है। जिले में रहने वाली जनजातियों का सबंध किसी न किसी युग एवं काल से मिलता -जुलता है। सतयुग के समय विदर्भ की राजकुमारी दमयंती के साथ विवाह के बाद उसके त्याग के बाद जंगलो में भटकने वाले राजा नल ने जिले के मासोद ग्राम के पास स्थित तालाब की मछली को भूनने का प्रयास किया था लेकिन मछली उछल कर तालाब में जा गिरी। इस क्षेत्र में प्रचलित कथाओं में नल – दमयंती के संदर्भ में यह कहा जाता है कि   ऊंचा खेडा पर पटटन गांव , मंगलराजा मोती – दमोती रानी बरूवा बामन कहे कहानी , हमसे कहती उनसे सुनती सोलह बोल की एक कहानी , सुनो  महालक्ष्मी रानी , विदर्भ का यह क्षेत्र जिसे महाभारत में चीचकदरा जो वर्तमान में खिचलदरा कहलाता है इस क्षेत्र का राजा कीचक था जो कि विराट के राजा का साला था । कीचक अखडा का नाम कीचकधरा जो वर्तमान में बैतूल एवं पडोसी राज्य महाराष्ट्र के अमरावती जिले के परतवाडा क्षेत्र से लगा हुआ चीखलदरा कहलाता है। राजा कीचक की कुल देवी वेराट देवी का स्थान बैतूल जिले के प्रभात पटट्न गांव में था जो प्राचिन में परपटटन गांव के रूप में जाना जाता था। महाभारत के पूर्व अज्ञातवास के दौरान में पांचो पाडंव राजा कीचक के राज्य में स्थित सालबर्डी की गुफाओं में भी रहे जो कि अभी भी मौजूद है। पांडव पुत्र जीवन संगनी पर बुरी नज़र रखने के कारण ही पांडव पुत्र भीम ने कीचक को मारा था। बैतूल जिले में त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने ही मां सूर्य पुत्री ताप्ती नदी के किनारे शिवधाम बारहलिंग में बारह शिवलिंगो की स्थापना ताप्ती के तट पर पत्थरो पर भगवान विश्वकर्मा की मदद से की थी जो अभी भी मौजूद है। इस स्थान पर सीता स्न्नानागार भी मौजूद है जहां पर माता सीता ताप्ती के तट पर स्नान करती थी। इस क्षेत्र में वनो में सीताफल पाये जाते है जिनका उल्लेख रामायण में भी है। रामायण की चौपाई में कहा गया है कि माता सीता पुछती है कि प्रभु अति प्रिय फल मोरा तब भगवान ने इसका नाम सीता जी के नाम पर सीताफल दिया था। कुरूवंश के संस्थापक राजा कुरू की माता ताप्ती का बैतूल जिले में जन्मस्थान के कई प्रमाण है जैसे नारद टेकडी , नारद कुण्ड , सूर्य कुण्ड , धर्मकुण्ड , पाप कुण्ड , शनिकुण्ड , सात कुण्ड बैतूल जिले में ताप्ती जन्मस्थली में मौजूद है। बैतूल जिले में आज भी सबसे अधिक शिवलिंग तापती नदी के किनारे है जो कि इस बात के प्रमाण है कि रावण पुत्र मेघनाथ ने तापती के किनारे कठीन तपस्या की थी। यह क्षेत्र रावण के बलाशाली पुत्र मेघनाथ का राज्य का हिस्सा रहा है इसलिए यहां के मूल निवासी आज भी गांवो में मेघनाथ – रावण – कुंभकरण की पूजा करते है। ताप्ती नदी के किनारे देवलघाट नामक स्थान भी है जहां से देवता बीच नदी में स्थित सुरंग से स्वर्ग को प्रस्थान किये थे। इस जिले में चन्द्र पुत्री पूर्णा का भी जन्मस्थान  पुष्पकरणी है जो कि भैसदेही के पास है। बैतूल जिले का प्राचिन इतिहास इस बात को प्रमाणित करता है कि सूर्य एवं चन्द्रवंश की दो देव कन्याओं का इस जिले में उदगम स्थान है तथा इस जिले से ही वे निकल कर भुसावल के पास मिलती है। बैतूल जिले में कई प्राचिन अवशेष भी है जिन्हे आज जरूरत है समझने एवं परखने की ।
मां ताप्ती जागृति मंच जिला बैतूल मां सूर्य पुत्री ताप्ती की महिमा को जन – जन तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। कोई भी जिझासु व्यक्ति कभी भी सम्पर्क कर मिल कर जानकारी प्राप्त कर सकता है। नेट पर भी ताप्ती महिमा के नाम से एवं ताप्ती जी के नाम पर कई कथायें दे चुका है।
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रामकिशोर पंवार
संस्थापक
मां ताप्ती जागृति मंच बैतूल

”ए मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर तुम नाराज न होना ………..!”
रामकिशोर पंवार ”रोंढावाला ”
प्यार -लव -प्रेम – मोहब्बत और न जाने कितने नामो से पहचाने एवं पुकारने जाने वाला यह ढाई अक्षर का शब्द दरअसल में किसी अफसाने – तराने से कम नही है। प्यार जिदंगी में हर किसी को होता और छोड़ता रहता है। अकसर लोग कहते है कि ”ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित हो….! प्यार दरअसल में भूले बिसरे गीतो की तरह होता है जब बजता है तो याद आ जाता है गुजरा जमाना। हर व्यक्ति का अपनी इस मौजूदा जिदंगी में किसी न किसी से प्रेम जरूर होता है। जिसका किसी से प्रेम न हो वह व्यक्ति अनजाने में प्रेम कर बैठता है इस बात का उसे भी अदंाज नहीं होता है। वैसे कोई माने या न माने लेकिन सच तो कड़वा होता है बिलकुल नीम और करेले की तरह जिसको पीने से पहले उसकी गंध ही जी को मचला देती है। दरअसल में होता यह है कि हर किसी को अपने जीवन में कभी न कभी किसी अनजान एवं पहचान के मेल – फिमेल से प्यार – लव हो जाता है। वैसे लव की पूरी परिभाषा की जाये तो उसे भी शार्टकट में लफड़ा वाला या वाली कह सकते है। आजकल लव के चक्कर भी इतने जबरदस्त हो जाते है कि कई बार उसका जुनून किसी भी हद – सीमा को पार कर लेता है। लव के चक्कर में कई लोग निपट गये और कई को लोगो ने निपटा दिया। आजकल कलर्स और कलर टीवी पर कई लव के लफड़े बाज धारावाहिक आ रहे है। लोगो का ऐसा पागलपन लव के लफड़े को गांव की गलियो तक ले जा चुका है। आजकल गांवो में भी हीर – रांझा और लैला मजनू के कलयुगी किस्से सुनने को मिलते है जिसमें धोखेबाजी और चालबाजी देखने को सामने आती है। बैतूल के कुछ समाचार पत्रो में आजकल आन किलिंग का मामला रोज छप रहा है।   विक्रम और बेताल की तरह रोज नये सवालो के साथ इस तरह के किस्से सुनने को मिल रहे है। हाल ही में लव के लफडे के चक्कर में सारनी के एक अधिकारी की उसकी पत्नि ने पोल खोल दी। सारनी थर्मल पावर स्टेशन की राख से गर्म हो चुके अधिकारी ने जब अपनी वासना को ठंडा और शीतल करने के लिए किसी शीतल की जगह चीतल का उपयोग कर लिया तो अधिकारी महोदय की श्रीमति घायल शेरनी की तरह दहाड़ कर उस चीतल पर झपटा मार कर उसे घायल कर दिया। शर्मसार अधिकारी इसे प्यार का तराना तो बता रहा है लेकिन गीदड़ की तरह दुम दबा कर भागे अधिकारी को उसकी बीबी ने इस तरह बेनकाब कर दिया कि बेचारे ने शर्म के मारे घर में ताला लगा कर कुछ दिनो के लिए घर छोड़ कर वन टू का फोर हो जाने में ही अपनी भलाई समझी। अब मीडिया उसे खोज रही है तभी तो रहमान को रहम नहीं आई और उसने अधिकारी को सार्वजनिक पोस्टर बना डाला। आजकल इंसान अपने अंदर छुपे वासना के जानवर को भी प्यार का नाम देकर उसे बदनाम करने में लगा हुआ है। बैतूल जिला मुख्यालय पर आजकल लव के लफड़े में क्या कुछ नहीं हो रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के एक कर्मचारी ने अपने प्यार के लिए उसे कम्प्यूटर्स तक भेट कर दिया। उसके लिए मकान तक विभाग के इंजीनियरो की मदद से बनवाने के बाद भी वह लव के लिए कुछ भी करेगा की स्थिति में है। बैतूल जिले में लव के लफड़े आजकल हर कहीं सुनने को मिलने लगे है अब इन लफड़ो से तो बेचारा जिला पंचायत भी नहीं बच सका है। यहां पर भी लव का पंचायती राज चल रहा है। लव का लफड़ा पुलिस से लेकर प्रेस तक में देखने को मिलता रहता है। लव के लिए कुछ भी करेगा कि स्थिति में शाहपुर का एक थानेदार अपनी बेटी समान बाला को लेकर वन टू का फोर हो चुका है। लव के चक्कर में एक वरिष्ठ समाजसेवी पत्रकार भी बुरी तरह से पीट चुका है। लव के चक्कर में बैतूल जिले में जबदस्त बहार चल रही है। हर किसी पर लव के चक्कर में फागुन की मस्ती छा गई है। लड़के – लड़की भागे रहे है वहां तक तो ठीक है लेकिन अब तो लव के लफड़े में अधेड़ भी गधे के सिंग की तरह गायब होने लगे है। किस्सा अभी कुछ दिन पुराना ही है जिले के एक गांव के सबके प्यारे दादाजी जी पोता – पोती के रहते हुये नौ दो ग्यारह हो गये अब उनका नाम और लोकेशन इसलिए नहीं बता सकते क्योकि कुछ भी कहे भैया मामला ससुरी इज्जत का जो आ गया है। किसी ने ठीक ही कहा है कि प्यार जात – पात नहीं देखता …. प्यार में आदमी अंधा हो जाता है लेकिन यदि कोई अंधा व्यक्ति ही प्यार करके उसकी आंखो में अपनी जीवन की दुनिया देखने लगे तब आप क्या कहेगें…..? इस अवसर पर तो बस यही शायराना अदंाज कुछ इस तरह से गाया जा सकता है कि तराना गाया जा सकता है कि ”तेरी आंखो में डूब जाऊंगा , कोई अंधा न कहे इसलिए चश्मा लगाते रहूंगा…..!  वैसे भी प्यार को लेकर लोगो ने इतना कुछ कहा एवं लिखा तथा गाया है और इसके आगे कुछ कहने को मन नहीं करता लेकिन प्यार के किस्से रोज जो सुनने को मिलते है उसे देख कर चुप रहा भी नहीं जा सकता। प्यार में एकरार और तकरार तो होना स्वभाविक है लेकिन कई बार तो एक तरफा प्यार में एकरार – तकरार के अलावा भी बहुंत कुछ हो जाता है। वैसे मुझे यह कहने या स्वीकार करने में कोई एतराज नहीं कि मुझे भी ज्योति से प्यार हो गया था…..? मैं कितना भी कुछ कहूं इस प्रेम के बारे में लेकिन पाथाखेडा के स्कूल से तो मुझे निकाला ही गया था अपनी कथित प्रेमिका ज्योति को प्रेम पत्र लिखने के चक्कर में…….! हालाकि उस समय मैं प्रेम के सहीं अर्थो को समझ नहीं सका था । आज जब उस बीते पल को याद करता हँू तो मेरे दिल के किसी कोने से आहट आती है कि उस पर कटी बालो वाली कजरारी आंखो से कह दूं कि ”ज्योति आइ लव यू…… हालाकि बरसो पहले के उस कथित प्रेम पत्र को लेकर यह कहना कि ”ए मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर तुम नाराज न होना की तुम मेरी जिदंगी हो की तुम मेरी बदंगी हो …………!  अब इतने दिनो बाद उससे यह कहना कि ”मुझको तुम से प्यार है…….! बेमानी होगा क्योकि अब वह दुसरे की अमानत हो चुकी है। अब जब उसके और मेरे बच्चो के प्रेम करने के दिन आ गये तब मेरा यह कहना न्याय संगत नहीं होगा कि ”तुझे मैं चांद कहता था मगर उसमें भी दाग है, तुझे मैं सूरज कहता था उसमें भी आग है……! मेरा ऐसा कहना दो परिवारो को जला कर राख कर सकता है। अब केवल इतना ही कहा जा सकता है कि ”तुझे गंगा मैं समझुंगा – तुझे जमुना समझुंगा , तू दिल के पास है इतनी है कि तुझे अपना मैं समझुंगा …….! आज भी मेरे तरह ऐसे लाखो – करोड़ो लोग होगें जो कि ”अजीब – प्रेम की गजब कहानी  के शिकार बने हुये है। ऐसे में उससे मेरा यह कहना कि ”ज्योति आई लव यू ……! सही नहीं होगा लेकिन प्रेम के अर्थ कई प्रकार के भी हो सकते है। कोई जरूरी नहीं है कि प्यार का मतलब पति – पत्नि के रूप में ही देखे जाये क्योकि हर किसी की किस्मत में एश्वर्या राय नहीं होती है इसलिए किसी को ललीता पंवार से भी काम चलाना पड़ता है। प्रेम के अर्थ का तब भी गलत अर्थ निकाला है तब – तब प्रेम बदनाम हुआ है।  प्रेम ज़हर भी है और संजीवनी भी लेकिन यह तो पीने वाले की तासीर पर निर्भर करता है कि उसे वह किस रूप में स्वीकार करे। प्रेम के लिए चक्कर में घर तबाह हो चुके है। प्रेम को वफा और बेवफा दोनो प्रकार से देखा एवं परखा जा सकता है। बचपन का प्रेम और वह गुडडा – गुडडी का खेल जवानी के दहलीज तक नये रूप में सामने आता है तब भी कई बार घुट – घुट कर मरना पड़ता है। प्रेम राधा और मीरा की तरह हर कोई नहीं कर सकता है लेकिन प्रेम तो आजकल राखी सावंत की तरह हो गया है जो कि मुन्नी की तरह बदनाम होता चला आ रहा है और न जाने कब तक वह मुन्नी की तरह बदनाम होता रहेगा…….! अंत में चलते – चलते यही कहना चाहता हँू कि ”भरी दुनिया में आखिर दिल को समझाने कहां जाये ……!

जहाँ मत्था ना टेकने पर मंत्रियों के उतर जाते हैं सर से ताज
सारनी बैतूल.(रामकिशोर पंवार) पद पर बैठा व्यक्ति चाहे वह मंत्री हो या संत्री या फिर कंत्री कोई नही चाहेगा कि वह पदमुक्त हो या जाये या उसकी कुर्सी चली जाय। कुर्सी बचाने के लिए लोग क्या कुछ नहीं करते है। अगर मत्था टेकने या सर झुकाने से यदि मंत्री पद बना रहे तो लोग अपना सर हर किसी के सामने उठा कर बात ही नहीं कर सकते है। सारनी के बाबा मठारदेव के बारे में लोगो का ही नही केन्द्र एवं विभिन्न राज्यो तथा इस प्रदेश के मंत्रियो का यही अनुभव रहा है कि सारनी के बाबा मठारदेव के सामने मतस्तक न झुकाने तथा उसकी पहाड़ी के ऊपर से हवाई यात्रा करने वाले कई मंत्री उडन छु हो गये। कई मंत्रियो के लिए अभिश्राप बना सारनी दौरा उनके जीवन की अमीट छाप रहा है। यंू तो हमारे देश में कई चमत्कारी संत महात्मा हुए हैं। सब अपने आप में श्रेष्ठï कहे जाते हैं। सतपुड़ांचल की हरी-भरी वादियों में बसे मठों के मठाधीश बाबा मठार देव के चमत्कार जग जाहिर हैं। बैतूल जिले का प्रमुख औद्योगिक नगर सारनी देश-प्रदेश में सतपुड़ा ताप बिजली घर के रूप में जाना जाता है। यह नगर सतपुड़ा की हरी-भरी वादियों के बीच इटारसी-नागपुर रेल मार्ग के घोड़ाडोंगरी रेल्वे स्टेशन से 18 किमी की दूरी तथा राष्टरीय राजमार्ग की मुख्य सड़क के बरेठा ग्राम से 32 किमी की दूरी पर स्थित है। इस सतपुड़ा की सुरम्य पर्वत माला में 3028 फीट की ऊंचाई पर श्री-श्री 1008 बाबा मठारदेव महाराज का मंदिर बना है। किदवंती कथाओं के अनुसार समूचे मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट के असंख्य श्रद्घालू भक्तों की आस्था के प्रतीक श्री श्री 1008 बाबा मठारदेव ने 300 वर्ष पूर्व इस शिखर पर तप किया था। ऐसी मान्यता है कि तीन शताब्दी पूर्व बरेठा बाबा, बागदेव बाबा तथा मठारदेव बाबा नामक तीन चमत्कारी संत पुरूष भगवान शिव के उपासक के रूप में प्रसिद्घ थे। बाबा मठारदेव के तप बल के प्रताप से ही बीते कई सालों से क्षेत्र के लोगों का जीवन खुशहाल एवं संपन्न है। बाबा की पहाड़ी के नीचे कल-कल कर बहती तवा नदी के किनारे बना सारनी ताप बिजली घर एवं प्रचुर मात्रा में जमीन के गर्भ में छुपी पाथाखेड़ा की 8 कोयला खदानों में से निकलने वाला कोयला बाबा के चमत्कार की देन है। मौजूदा दौर में सारनी ताप बिजली घर में बिजली का विपुल कीर्तिमान उत्पादन और पाथाखेड़ा की खदानों को मिलने वाले पुरूस्कार बाबा के आशिर्वाद का प्रसाद मानते हैं। बाबा के चमत्कार के कारण उनके अनुयायी विभिन्न धर्म, संप्रदाय तथा आचार-विचार के बाद भी बाबा के दरबार में अपनी मुराद के लिए दौड़े चले आते हैं। मनचाही मुराद पूरी होने पर बाबा के स्थान पर बकरे, मुर्गे की बलि देते हैं। बाबा के चमत्कार के बारे में सारनी ताप बिजली घर के कर्मचारी बताते हैं कि बाबा के मंदिर में 1966 में तत्कालिक सतपुड़ा ताप बिजली घर के प्रोजेक्ट आफिसर डीएस तिवारी ने पहली बार बिजली पहुंचाई जो आज तक जल रही है। कहा जाता है कि 1966 से सारनी ताप बिजली घर में दुर्घटनाएं तथा अकाल मौत में कमी आई है। एक बार बाबा के मंदिर में लाईट नहीं जली तो 31 मार्च 83 को 12 लोग जल गए। जिसमें 6 की जीवन लीला समाप्त हो गई। इसी तरह एक बार फिर मंदिर की बिजली गुल हो गई तो 14 लोगों को ले जा रही नाव राजडोह में डूब गई। जिसमें एक भी जीवित नहीं बचा। 93 में बंकर की क्षति के पीछे भी मंदिर का अंधेरा बताया जाता है। लोग शाम होते ही बाबा की लाईट देखकर ताप बिजली घर की तथा आम जन मानस  की खुशहाली की कामना करते हैं। बाबा की इस शिखर माला पर बिजली व्यवस्था के लिए 74 पोल लगाए गए हैं, जिनकी देख-रेख नगरपालिका प्रशासन करता है। श्री १००८ बाबा मठारदेव सारनी
बाबा मठारदेव एक बहुत सिध्ध स्थान है यहाँ पर आने के लिए राजमार्ग ६९ इटारसी से बैतूल के मध्य ग्राम बरेठा से ३३ किलोमीटर की दूरी पर है रेलवे मार्ग के मध्यम से भी बाबा मठारदेव तक पहुँचा जा सकता है घोडाडोंगरी रेलवे स्टेशन से १८ किलोमीटर की दूरी पर बाबा मठारदेव का मन्दिर ३००० फिट की पहाडी पर स्थित है यह मन्दिर चारो और से पहाडियों से घिरा हुआ है तथा एक तरफ़ सारनी नगर और सतपुडा बाँध है यह बात बहुत पुरानी है जब में मध्य प्रदेश विद्युत् मंडल के सतपुडा थर्मल पॉवर स्टेशन का निर्माण हो रहा था कहा जाता है जहाँ पैर सतपुडा थर्मल पॉवर स्टेशन का निर्माण हो रहा था वहां एक बहुत पुराना पीपल का वृक्ष था जिसको निर्माण के लिए काटना था पहली बार जब काटने वाले ने उस पीपल के वृक्ष पैर कुल्हाडी चलायी तो उसमे से रक्त की धर निकलने लगी जिस कारण से उसने वृक्ष नही कटा तत्पश्चात उस वृक्ष को क्रेन से उखाड़ने का प्रयास किया गया परन्तु क्रेन दो बार पलट गई सभी प्रयास निष्फल हो गए पर जब मध्य प्रदेश विद्युत् मंडल ने इनाम की घोषणा की तो एक गरीब व्यक्ति आया और उसने वृक्ष की पूजा कर कहा मुझे मेरी दो लड़कियों की शादी करनी है तत्पश्चात उसने वृक्ष को काटना शुरु किया बिना किस दिक्कत के उसने वृक्ष को काट दिया उस वृक्ष में से मठारदेव बाबा निकले और सतपुडा की पहाडी पर ३००० फिट ऊपर समाधी ले ली बरसो पहले की बात है जब पॉवर स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा था तब यहाँ एक कंपनी के कुछ उत्साही युवको ने पहाड़ के ऊपर जाने का निश्चय किया उन दिनों पहाडी पर जाने का कोई और रास्ता नही था परन्तु अपनी धुन के पक्के युवक साहस के साथ सभी बाधाओ को पर कर शिखर पर पहुच गए वहां पहुचकर उन युवको ने अद्भुत चमत्कार देखा टूटी फूटी घास की मढिया और उसके आस पास झाड़ बहार के साफ़ सफाई हुयी थी मढिया के सामने अखंड धुनी जल रही थी ऐसा आभास हो रहा था यहाँ अभी अभी कोई व्यक्ति आया था जिसने साफ़ सफाई करके शिवलिंग को धोकर ताजे फूल चढाये हो परन्तु पहाड़ की निर्जन चोटी पर सांय सांय चलने वाली हवा के अलावा कुछ भी नही था फिर भी युवको ने सोचा कोई तो होगा जो दोबारा यहाँ जरूर आएगा यह सोचकर सभी वहां ठहर गए लेकिन कोई नही आया नीचे उतारते समय अचानक एक युवक को पत्थर की ठोकर लगी और संतुलन बिगड़ने के कारन वो चट्टानों से टकराता हुआ हजारो फिट गहरी खाई में गिर गया जब उसके दोस्तों ने उसके खोजना शुरु किया तो वह तो वह पहाडी के नीचे बेल के पेड़ के नीचे सो रहा था जब उसने खाई में गिरने की बात सुनाई और कहा मुझे ऐसा लगा मुझे हाथों से पकड़कर किसी ने संभल लिया और पलक झपकते ही पेड़ के नीचे लाकर सुला दिया आखिर हजारो फिट गहरी खाई में गिरा व्यक्ति कैसे जीवित रह सकता है सारनी से दमुआ मार्ग पर बहुत से ट्रक चालको को समय समय पर बाबा मठारदेव ने प्रत्यक्ष या अप्रतक्ष्य रूप से दर्शन दिए है दमुआ के निवासी एक ट्रक चालक ने बताया वो एक दिन मध्य रात्रि सारनी जा रहा था तभी बाबा मठारदेव की पहाडी के नीचे एक बाबा ने उसे रोका लिफ्ट मांगने के लिए पर उसने ट्रक नही रोका आगे थोडी दूर जाकर उसका ट्रक बंदरिया घाट पर पलट गयामई का महिना था तीन युवक पहाडी पर चढ़ते चढ़ते प्यास के व्याकुल हो उठे उनमे इतनी शक्ति भी नही थी की और चल सके तभी एक बुध बाबा मटका लेकर आ रहा दिखाई दिया जब उन्होंने बुढे बाबा को पुकारा तो वो आया और अपने मटके का जल पिलाया तब युवको ने पानी के स्त्रोत के बारे में पुछा बुढा बाबा उन्हें पहाड़ में बनी एक गहरी झील की चट्टान पर ले गया और वहां गीली सी जगह बताई और कहा इसे खोदो इसमे से जल निकलेगा जो बाबा के भक्तो की प्यास बुझायेगा और बाबा पेड़ के नीचे बैठ गया जब तीनो ने खोदा तो चट्टान के नीचे से पानी की फुहार निकल पड़ी और जल नीचे की तरफ़ बहने लगा जब बाबा की तरफ़ उन्होंने देखा तो पेड़ की छाया में बैठे बाबा नही थे कुछ दिनों बाद उस झील से बाबा के मन्दिर तक पाइप लाइन डाल दी गई और पानी की एक विशाल टंकी बनाकर भक्तो के लिए पानी की व्यवस्था की गई ऐसे बहुत सरे अनुभव बाबा मठारदेव के भक्तों से सुने जा सकते है प्रतक्ष्य को प्रमाण की आवश्यकता नही होती बाबा के चमत्कार बहुत लोगो ने देखे है आज भी देख रहे है आज भी सतपुडा की पहाडी में बाबा मठारदेव की जिंदा समाधी मौजूद है सतपुडा थर्मल पॉवर स्टेशन के तत्कालिन मुख्य अभियंता को बाबा मठारदेव ने सपने में दर्शन दिए और आदेश दिया की वो बाबा मठारदेव पहाडी पर बिजली की व्यवथा करे इसके बाद मध्य प्रदेश विद्युत् मंडल ने पहाडी के नीचे से ऊपर तक लाईट की व्यवस्था की जो की रात में जेडनुमा आकृति का निर्माण करती है बाबा मठारदेव की महिमा अपरम्पार है प्रतिवर्ष यहाँ पर १४ जनवरी से दस दिनों के लिए मेले का आयोजन होता है जिसमे लाखो श्रद्धालु बाबा मठारदेव के दर्शन के लिए दूर दूर से आते है
नवनिर्मित बाबा का मन्दिर सभी सुविधाओ से परिपूर्ण है पक्की सीढियाँ, नीचे से ऊपर तक विद्युत् प्रकाश की व्यवस्था तथा प्राकर्तिक पड़ी से निकलने वाले शुध्ध जल की व्यवस्था की गई है कुछ भक्तो द्वारा यहाँ पर नीचे शिव, गणेश एवं हनुमान जी के मन्दिर बनवाए गए है बाबा मठारदेव को शिव का रूप माना गया है यहाँ पर लोगो की सभी मुरादें पुरी होती है इसलिए हर वर्ष यहाँ पर लाखो श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है बाबा मठारदेव सारनी का दौरा लगते है तथा श्रधालुओं को अप्रतक्ष्य रूप से दर्शन देते है सतपुरा थर्मल पॉवर प्लांट जिसकी डेट बहुत वर्षो पूर्व एक्सपायर हो चुकी है परन्तु बाबा मठारदेव की कृपा से आज भी विद्युत् का उत्पादन कर रहा है सारनी के आसपास बहुत सी कोयला खदानें है जो आज भी सफलतापूर्वक उत्पादन कर रही है सारनी के चमत्कारी बाबा देव की हरी-भरी सुरम्य मनोहरी वादियों में बसे श्री श्री 1008 बाबा मठारदेव के बारे में कहा जाता है कि इस दिव्य पुरूष ने अपने चमत्कार के सामने भारत शासन तथा राज्य शासन के अनेक मंत्रियों को अपना भक्त बना रखा है। जिस भी मंत्री ने बाबा के दरबार में हाजरी नहीं लगाई वे यहां से जाने के बाद अपना पद गवा चुके हैं। इस बात को प्रमाणित करती लंबी चौड़ी लिस्ट बाबा के चाहने वालों के पास रहती है। बाबा के सामने बाबूलाल गौर एक बार और भी नतमस्तक न होने का अभिश्राप भो चुके है।

बॉक्स में
जिनके सर से उतरे ताज
प्रमुख नेताओं में प्रधानमंत्री स्वर्गीय मोरारजी भाई देसाई, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों में पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र, अर्जुन सिंह, श्यामाचरण शुक्ल, कैलाश जोशी, सुंदरलाल पटवा, वीरेन्द्र कुमार सखलेचा, प्रकाश चंद्र सेठी, केन्द्रीय मंत्रियों में गार्गीशंकर मिश्र, आरीफ बेग, गनी खान चौधरी, नरेन्द्र कुमार साल्वे, राजेश पायलट, केसी पंत, कमलनाथ, पड़ोसी राज्य बिहार के राज्यमंत्री राजेन्द्र प्रारद यादव, मध्यप्रदेश शासन के राज्यमंत्रियों में स्व. रामजी महाजन, झुम्मकलाल भेडिया, विजयकुमार पाटनी, डाक्टर भवरसिंह पोर्ते, चनेशराम राठिया सहित दर्जन से भी अधिक मंत्रियों को हटना पड़ा। स्व. इंदिरा गांधी को जब सारनी के बाबा मठारदेव के बारे में पता चला तो वे सारनी का अपना दौरा रद्द कर अमरकंटक से वापस चली गई।
इति,

” भैया जी मर गये हो या हो जिंदा कुछ तो संकेत दीजिए ……! ”
लेख –  रामकिशोर पंवार ”रोंढ़ावाला ”
मां की महिमा शब्दो में बयां नहीं की जा सकती. मां के प्रकार कई है. जगत मां से लेकर धाई मां तक के बारे में हम पुराणो एवं इतिहास के पन्नो तक में किस्से कहानियां पढ़ते चले आ रहे है. जननी से बड़ी होती है जीवन दायनी मां क्योकि उसका त्याग उस मां के कोख के 9 माह के दर्द से ज्यादा होता है. जब बात श्रीकृष्ण के सामने आई कि ”वह आखिर लाल किसका है………! यशोदा का या फिर देवकी का ……!”  जग के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु ने उक्त सवाल का ऐसा जवाब प्रस्तुत किया कि मां यशोदा को यह पीड़ा ही नहीं हुई कि श्री कृष्ण ने उसकी कोख से जन्म ही नहीं लिया. श्री कृष्ण ने व्याकुल यशोदा को कहा कि ”मां लोग कुछ भी कहे लेकिन सारा संसार मुझे यशोदा तथा नंदबाबा के नाम से नंदलाला के नाम से ही जाना – पहचाना जायेगा….!”   भगवान श्री कृष्ण कहते है कि ”हे मां जननी से बड़ी होती है पालनहारी , इसलिए किसी भी प्रकार का विलाप न कर मां ….. तेरा दर्जा कोई दुसरा नहीं ले पायेगा….!” आज भी इस संसार में ऐसे कई उदाहरण बताये जा सकते है जिसमें कोख जननी से महान कहलाई है उसकी पालनहारी …… चाहे वह बात पन्ना धाई मां की हो या फिर रानी लक्ष्मी बाई की जिसने त्याग और ममता की ऐसी मिसाल पेश की है कि आज भी बरसो बीत जाने के बाद लोग उनके नाम के सामने नतमस्तक है. बैतूल जिले में भी संसाद की तरह नदियो को मां की तरह पूजा जाता रहा है. स्वच्छ – निर्मल – पावन जल का भण्डार देने वाली नदियां हमारी संस्कृति का मुख्य अंग है.विश्व की कई संस्कृति एवं सभ्यता नदियो के किनारे जन्मी और उसी के किनारे समाप्त हो गई. जब संसार की उस मालिक ने रचना की थी तब बात चली होगी जल – वायु की ऐसे में नदियो को भी पवन के साथ धरती और आकाश में अवतरीत किया होगा. ताप्ती के बारे में पुराणो में तो यही लिखा है कि भगवान सूर्य नारायण ने स्वंय के ताप से लोगो को मुक्ति दिलाने के लिए सबसे पहले ताप्ती को ही अवतरीत किया था इसलिए ताप्ती आदिगंगा भी कहलाई जाती है. आज इस नदी के धरती पर अवतरण के लाखो – करोड़ो साल बीत चुके है. इस नदी के किनारे कितने ही शहर – गांव और बस्ती बसी और मिट गई और नहीं मिटा तो सिर्फ इसका अस्तीत्व जो आज भी कायम है. सूर्य पुत्री कहलाने वाले मां ताप्ती को लेकर इस जिले के हर व्यक्ति में वही श्रद्धा के भाव है जो गंगा और यमुना तथा सरस्वती के प्रति है. कुछ महत्वाकांक्षी लोगो और लालची स्वभाव के पंडितो तथा महापात्रो ने गंगा को    महिमा मंडित किया जो कोसो दूर है. गंगा में पिण्डदान के बहाने लोगो को ठगने के गोरखधंधे तथा ताप्ती के महत्व को कम आकने के चलते इस जिले की वह नदी आज अपनो के बीच बेगानी हो गई जिसमें मात्र मृत आत्मा को तीन दिन में मुक्ति मिल जाती है. गंगा में प्रतिदिन हजारो अस्थियां लेकर पहुंचते परिजन सोचते होगें कि उसके द्धारा की गई अस्थी विसर्जन से उसके परिजन को मुक्ति मिल गई लेकिन लाखो – करोड़ो की संख्या में अस्थियो का दलदल बनी गंगा में डुबकी लगाने के बाद आपकी अंजुली में यदि किसी की अस्थी न आ जाये तो कहना…… यह कडुवा सच है लेकिन लोग ताप्ती को छोड़ नर्मदा को लांध कर अपने परिजनो की अस्थियां गंगा में लाकर बहा जाते है. साल में वहीं गंगा एक बार पूरी अस्थियों को लेकर मां नर्मदा के पास आकर उन्हे सौप कर उनकी मुक्ति की प्रार्थना करती है. इन सबसे हट कर मां ताप्ती तो किसी भी मृत देह के अंतिम संस्कार के तीसरे दिन ही उसे मुक्ति का सीधा रास्ता दिखा देती है.
मां  ताप्ती की महिमा के बाद मैं अपने मूल विषय पर आता हँू . लोग कहते है कि ”इसान की आत्मा जिंदा होती है …….! जिनकी आत्मा जिंदा होती है वही व्यक्ति पुण्य के काम करता है…..!” मुझे पिछले कई दिनो से ऐसा क्यूं लग रहा है कि ”हमारे जिले के भैया जी की आत्मा भी मर चुकी है…….! यदि हमारे भैया जी की आत्मा आज जिंदा होती तो क्या वे इस बात का बर्दास्त कर पाते कि ”उनके सरकार में रहते उनके ही जिले की पुण्य सलिला मां ताप्ती का नाम और महिमा का गान राज्य सरकार ने क्यों नहीं किया….! भैया जी तो इस बारे में आज तक किसी से कुछ बोले तक ही नहीं क्योकि आपको अंदर की बात शायद पता नहीं कि ”हमारे भैया जी को पता ही नहीं कि कोई गान – वान भी बना है या लिखा गया है…..! यह बात अलग है कि हमारे भैया जी किसी के फटे – पुराने में अपनी टांग नहीं डालते जिसके पीछे अंदर की बात कुछ और भी हो सकती है. ऐसा नहीं कि हमारे भैया जी बैतूल के ही है हमारे भैया जी तो हर उस गांव में है जिसके वे चौधरी बने हुये है. भैया जी हमारे हो या तुम्हारे लेकिन माई तो सबकी है न ऐसे में भी यदि भैया जी की आत्मा ही मर जाये तो फिर आप और हम आखिर क्या कर सकते …..! कुछ उन्नीस – बीस हो गया तो भैया जी को जिंदा करने में साल लग जायेगें तब तक को भैया जी के साले साहब वो धुलाई करेगें कि वाशिंग मशीन भी नहीं कर पायेगी….! अब इससे बड़ी शर्मनाक बात और सामने आई है. प्रदेश की सरकार पड़ौसी महाराष्ट्र सरकार के साथ मिल कर ताप्ती विकास प्राधिकरण बनाने जा रही है. अब ताप्ती विकास प्राधिकरण का मुख्यालय रहेगा वह बुराहनपुर शहर जहां से स्कूली शिक्षा मंत्री श्रीमति अर्चना चिटनीस प्रतिनिधित्व करती है. ताप्ती विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष पद से लेकर सारा लाभांश मैडम चिटनीस और पड़ौसी महाराष्ट्र के लोगो को मिलेगा. काश यदि हमारे भैया जी की आत्मा जिंदा होती तो हम गांव – गांव से भैया जी को शहर और जिला मुख्यालय से दिल्ली तक भिजवा कर इस बात का शोर मचाते कि ”हम अपनी मां के आंचल का दुध किसी और को इसलिए नहीं पीने देगें क्योकि हमारे कंठ अभी प्यासे है…..! हम भुख और प्यास से व्याकुल रहना नही चाहते इसलिए हम पहले शांती का पाठ पढाना चाहते है. पूज्य बापू जी और महान संत गुरू नानक देव भी मां ताप्ती के तट पर वही शांती और सदभावना का संदेश दे चुके है. इन सबको हमारी कमजोरी न समझे क्योकि मां ताप्ती के पावन तट पर गोरे अग्रेंजो की नाक में नकेल डालने वाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तात्या टोपे भी आ चुके है. हम चुप है तो सिर्फ इस बात के लिए कि हमारे गांव से लेकर शहर और जिले के चौधरी बने भैया जी की एक बार मरी आत्मा में जान आ जाये. लोग रावण की ममी को आज भी श्री लंका की उस अनजान पहाड़ी पर छुपा कर रखे है कि उसमें किसी भी तरह से जान आ जाये लेकिन अभी तो हमारे भैया जी ममी नहीं बने है. इस लेख के पीछे छिपी भावना के दर्द को भैया जी यदि समझ कर अपनी आत्मा को स्वंय के आत्मबल पर यदि जिंदा कर लेते है तो इस जिले का भलां हो सकता है. वैसे तो भैया की आत्मा को जगाने के दस तरीके है लेकिन वे सब ओछे एवं घटिया दर्जे के है जो हमारी संस्कृति के विपरीत है. हम तो बस यही चाहते है कि ”भैया जी की आत्मा जिंदा हो जाये ताकि उनके बहाने हम अपनी मां ताप्ती को वह मान सम्मान दिलवा सके जो आज डाकुओ की शरण स्थली चम्बल को मिल रहा है….! भैया जी को आखिर में चलते – चलते एक ही सुझाव है कि वे राम तेरी गंगा मैली का वह गाना जरूर याद रखे जिसमें यह कहा गया है कि ”देर न हो जाये कहीं देर न हो जाये ……!

बैतूल जिले में आधा दर्जन टुयूबवेलो से अविरल बह रही
जलधारा को रोकने के लिए किसी की भी रूचि नहीं
बैतूल  (रामकिशोर पंवार )  बैतूल जिले में इस समय आधा दर्जन  टुयूबवेलो से अविरल बह रही जलधारा को रोक कर उसके उपयोग करने में जिला प्रशासन कोई ठोस कारगर कदम नहीं उठा सका है.  जिले के पोहर ग्राम पंचायत क्षेत्र में एक नहीं बल्कि दो टुयूबवेलो से बह रही जलधारा को यदि प्रशासन समय रहते रोक पाता तो पोहर सहित आसपास की दर्जनो ग्राम पंचायतो की सुरसा की तरह मँुह फाड़े खड़ी समस्या से छुटकारा मिल जाता . जिलें मे इस समय विगत 25 वर्षो से जल उगल रहे ग्राम चोपनीखुर्द के टुयूबवेल से प्रतिदिन बिना बिजली और मोटर के 30 सेकेण्ड में 2 सौ लीटर पानी को फेका जा रहा है. मात्र 60 से 70 फीट की खुदाई पर वन ग्राम थावडी के समीप एक , पोहर में दो , चोपनीखुर्द में एक तथा दो अन्य स्थानो पर खोदे गये टुयूबवेलो से बह रही जलधारा को यदि समय जिला प्रशासन रोक पाता तो तीसरे विश्व युद्ध के प्रकोप से बैतूल जिले को बचाया जा सकता था. बैतूल जिले की मुलताई एवं भैसदेही तहसीलो के जिन गांवो में पानी की अविरल धारा प्रकृति द्धारा बिना बिजली और मोटर के बहाई जा रही है उसे ताप्ती – पूर्णा नदी में नदी नालो के माध्यम से भी यदि परिवर्तित कर दिया जाता तो गर्मी में इन नदियो की बहती जलधारा हजारो कंठो की प्यास का बुझा पाती. जल संरक्षण के नाम पर केन्द्र एवं राज्य सरकार के मद से विगत  एक दशक मे जितना पैसा जिला प्रशासन अपने अधिनस्थ विभागो से खर्च कर चुका उससे मिली सफलता का प्रतिशत निकाला जाये तो यह नतीजा सामने आता है कि अकेले चोपनी खुर्द के टुयूबवेल ने प्रतिदिन 14 हजार 4 सौ लोगो के लिए उपयोगी जल को प्रतिदिन बाहर फेकता है. इस टुयूबवेल से 24 हजार लीटर की जल निकासी होती है . बैतूल जिला प्रशासन इन बीते एक दशक में 24 हजार प्रति लीटर जल को संरक्षित कर लेता तो भी वह दस सालो में शासन द्धारा खर्च राशी से चार गुणा अधिक जल जल संरक्षित होता. अब सवाल यह उठता है कि जिस जिले में ताप्ती सरोवरो एवं जल सरंक्षण के नाम पर स्टाप डेमो के निमार्ण पर लाखो रूपैया पानी की तरह बहाया वह किस काम का जब हम बहते हुये पानी को ही नहीं रोक पाये. प्रति व्यक्ति को औस्तन 40 लीटर जल की जरूरत पड़ती है ऐसे में जिले के उन टुयूबवेलो से बहने वाले जल से कितने व्यक्तियो की जरूरत पूरी हो सकती थी जिसे गर्मी में एक लीटर भी जल के लिए लाले पड़ जाते है.  आज यही कारण है कि जिले में चार दर्जन पहाड़ी एवं मैदानी ऐसी नदियां है जिन पर बांध बनाया जा सकता था लेकिन इस जिले का पानी ताप्ती के माध्यम से गुजरात पहुँच जाता है और ताप्ती पूरे गुजरात की जीवन रेखा बनी हुई है. इसी तरह वर्धा का पानी महानदी होता हुआ अरब सागर में मिल जाता है. जिले का पानी दो अलग – अलग सागरो में तो मिल रहा है लेकिन जिले का पानी जिले के लोगो के लिए किसी भी काम का नहीं क्योकि बहाने बाज अफसरो के चलते ताप्ती नदी का पानी चंदोरा के अलावा कहीं पर भी रोका नहीं जा सका है.

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मदर्स डे पर मां की महिमा


निदा फाजली के शब्दो में

बेसन की सोंधी रोटी पर खटट्ी चटनी जैसी मां,
चुल्हा चौका फूकनी बेलन चिमटा जैसी मां,
एक फटे पुराने एलबम में चचंल हिरणी जैसी मां

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उल्लू अगर दुनिया खत्म हो गई तो क्या मैं मरण दिवस मनाऊंगा….?

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रामकिशोर पंवार रोंढावाला
इस बार 23 मई को मैं 47 साल का हो जाऊंगा लेकिन साले मेरे जन्मदिन के करीब आते ही जलनखोर मेरी वर्षगांठ को बर्दास्त नहीं कर पा रहे हैं और पूरे देश – दुनिया भर में 21 मई को प्रलय आने की बाते फैला कर लोगो को डराने धमकाने में लगे हैं। दुनिया के खत्म हो जाने का ऐसा प्रचार पहले भी कई बार हो चुका हैं। मैं ऐसे में उन जलनखोरो से पुछना चाहता हूं कि साले तुम इतने बडे भविष्य वक्ता हो तो उस समय कहां मर गए थे जब मैं शादी करने जा रहा था। साले कम से कम उस समय बता देते कि आगे खतरा हैं। मैं संभल जाता लेकिन सालो को मेरी बैंड बजाने में ही मजा आता हैं। मेरी जब टांग टूटने वाली थी तब साले बता देते कि जीजा आगे मत जा तेरी टांग टूटने वाली हैं। मेरा अच्छा तो देख ही नहीं सकते और जब देखो तब मेरे लिए या तो गडडा खोदेगें या फिर धक्का मार कर गिराने का काम करेगें। इस बार मैने सोचा कि यार जीवन के 47 साल रोते – धोते गुजर गए चलो अच्छा हुआ इस साल अपना जन्मदिन धुमधाम से मना लेगें लेकिन पता नहीं इनको क्यो लोगो के फटे में टांग डालने की आदत रहती हैं। मेरा अच्छा खासा जन्म दिन को मरण दिन बनाने में लगे हुए हैं। साला जानता नहीं कि मैं बडा चीकट प्राणी हूं अकेला जाऊंगा नहीं पूरी बरात लेकर जैसे शादी करने गया था वैसी साथ लेकर ऊपर जाऊंगा। मैं जाते – जाते अपने में दुसरो से खुटी ठुकवाने के बाद दुसरो की भी खुटी ठुकवा कर जाऊंगा। 23 मई का मुझे कई महिनो से इसलिए इंतजार रहता हैं कि चलो जीवन का एक साल कम तो हुआ। सजा का कहो या मजा का एक साल यदि हसते – खाते कट जाएगा इससे बडी बात और क्या होगी। राम को 14 साल का वनवास हुआ था लेकिन राम नाम लेकर पैदा होने के कारण दुसरे तर गए लेकिन बेचारे राम वनवास के बाद जीवन का कारावास काटने के बाद ही जा पाए। मैं इस कटू सत्य को जानता हूं कोई माने या न माने लेकिन ज्योतिषी भी मेरे ज्ञान के सामने बच्चे हैं। राम जपे हर कोई तैरे वही जिस पर रामकृपा होई ……. राम को जीवन की वैतरणी को पार करने के लिए अपने नाम के कारण ही इतना सब कुछ कृष्ट भोग सके हैं। नाम का पछला अक्षर तुला राशी के तराजू के समय एक हो नहीं सकता। माता – पिता अपने मरने से पहले पुत्रो का नाम भगवान के नाम के रूप में इसलिए रखते थे कि मरते – मरते राम नाम तो निकले और राम नाम लेकर माता – पिता तर गए। उस पुत्र का क्या होगा जो राम का नाम मिलने के बाद वनवास और कारावास काटता हैं। ऐसे हजारो नहीं लाखो उदाहरण दिये जा सकते हैं जिनके नाम के अनुरूप उन्हे कृष्ट एवं त्रासदी भोगनी पड़ी हैं। इस बार के महाप्रलय की घोषणा से मुझे उस स्काईलैब की याद आ गई जो गिरने वाला था। वह घटना भी दिलो – दिमाग पर उभरने लगी जब एक बार इसी महान दुरात्मा ने पृथ्वी पर विनाश आने की बात कहीं थी। विनाश को ऐसे प्रचारित किया जा रहा है जैसे वह तिरंगा फिल्म का प्रलयनाथ होगा। तिरंगा के पलयनाथ गुण्डा स्वामी का राजकुमार एण्ड कंपनी ने क्या हाल किया था सभी को अच्छी तरह से पता होगा। प्रलया या विनाश की घोषणा दूर परदेश में बैठा तथाकथित धर्मगुरू ऐसे कर रहा है जैसे वह इन जब इन महाशय का पालतू कुत्ता होगा जिसे कहा और काटने के लिए आ धमका। मैं धमकी से नहीं डरता क्योकि मैं डर – डर कर जीना कभी नहीं सीखा और न मैं डर – डर कर मरना चाहता हूं। जब भगवान कृष्ण नहीं बचे तो मैं क्या हूं…? दुनिया के खत्म होने की अफवाह फैलाने वाला यदि मेरे मोहल्ले का आदमी होता तो साले की मेरी तरह टांग तोड़ देता। ऐसा पाखंडी आदमी मेरी नजर में किसी गंध मारते कुत्ते , हरामी , सुअर की औलाद से कम नही हैं जो बिना वजह लोगो को डराने चला आया है। खुद के पांव कबर में लटके है और दुनिया को लटकाने की बात कर रहा हैं। हमारे ग्रंथो में भी भगवान विष्णु का चौथा कलगी अवतार कलयुग में होना हैं लेकिन अभी दिल्ली कोसो दूर हैं। जिस दिन के इसंानो का पापों घड़ा भर जाएगा उस दिन वह लुढ़क जाएगा। इसमें नई बात क्या हैं। यदि सच सुनना लोगो को पंसद है तो सच यह हैं कि ईसा और मूसा के पहले भी कोई इस धरती पर आया था। हजरी संवज और ईसा संवत के पहले से भी संवत चले आ रहे हैं। मैं पहले मुर्गी आई की अण्डा उस विवाद में नहीं पडऩा चाहता लेकिन किसी पर भी अपनी बात को थोपना श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की स्टाइल में अच्छी बात नहीं हैं। अभी अप्रेल समाप्त नही हुआ और मई की चिंता ने अपनी चिता बना कर रख दी। ऐसे समय में जब पूरा विश्व आर्थिक सकंट से गुजर रहा हो ऐसे में दुनिया खत्म होने के डर से हर कोई बेइमान हो जाएगा तो पूरे विश्व की अर्थ व्यवस्था चौपट हो जाएगी। लिया है तो देना पडेेगा और बिना लिए और दिए काम भी नहीं चलने वाला। सोचो यदि सूरज या चांद निकलना छोड़ दे या हवा बहना छोड़ दे तो वैसे ही प्रलय आ जाएगा। प्रलय का आना किसी किताब की भविष्य वाणी नही हैं। हमारे कुंजीलाल को ऐसा रहता तो कब का मर जाना था लेकिन आज भी कुंजीलाल अपने कुल की चौथी पीढ़ी को देख चुका हैं। किसी के कहने से किसी नाश या सत्यानाश नहीं होता क्योकि इस समय तो ऐसा कोई नहीं हैं जो किसी न किसी का नाश – सत्यानाश हो जाए ऐसा न कहता हो। मुझे एक बालकथा याद आ गई। दो दोस्त थे दोनो में उधारी का प्रचलन था। एक दिन उन्हे डाकुओ ने पकड़ लिया। अब मौका देख कर एक दोस्त दुसरे से बोला कि यार वो तेरे कई दिनो से रूपए देने के थे वह ले ले। उसने सोचा चलो इस बहाने कर्ज से तो मुक्ति मिल जाएगी लेकिन दुसरा दोस्त उसकी नीयत को समझ गया उसने कहा नहीं यार दोस्ती में क्या लेने देन मैंने तुझे माफ कर दिया। उसने सोचा अब लूट तो रहे हैं चलो इस बहाने कुछ पुण्य कमा ले। डाकु ने उन दोनो की बाते सुन ली। डाकु बोला ऐसे में तुम दोनो को कभी मुक्ति नहीं मिलेगी क्योकि तुम दोनो की नीयत में खोट हैं। मैं ऐसे में तुम लोगो को लूट कर क्या करूंगा क्योकि तुम दोनो स्वार्थ के कारण परमार्थ को आडे ला रहे हो इसलिए तुम्हे लूटने से अच्छा हैं कि खुद लूट जाऊ…….. स्वार्थी व्यक्ति को परमार्थ कभी नहीं मिलता है और पाखंडी से ज्यादा सटीक शिखंडी की कहीं बाते होती हैं। इसलिए आज भी हमारे देश में बच्चों की बलाए लेने के लिए शिखंडियों को बुलाने का रिवाज हैं। कुछ पैदाइश होते हैं कुछ बाद में अपने चाल – चलन के चलते या फिर धंधे के चलते बन जाते हैं। दुनिया के समाप्त हो जाने की अफवाह फैला कर दहशतगर्दी के ठेकेदार भले ही आज चैन की नींद सो गए हैं लेकिन ऐसे लोगो को आज नहीं तो कल बेनकाब होना पडेगा। मुझे दुनिया से ज्यादा अपने 47 साल पूरे होने का बेसब्री से इंतजार है और हर साल 23 मई का इंतजार रहेगा। दुनिया कल की खत्म होने वाली आज हो जाए मुझे इस बात की चिंता नहीं क्योकि मैंने संकल्प ले रखा हैं कि मेरी चिता मां सूर्यपुत्री ताप्ती के पावन जल के किनारे ही जले ताकि मैं अपनी मां के आंचल में चैन की नींद सो सकू। जय मां ताप्ती

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BETUL NEWS

रोगी कल्याण समिति बनी लूट खसोट समिति
अब जांच के बहाने रोगियो के परिजनो की जेब पर डाका
बैतूल, रामकिशोर पंवार: कहने को तो उसे रोगी कल्याण समिति कहा जाता हैं लेकिन वह रोगियो की कम सरकार की पक्षधर ज्यादा होती हैं। आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले में अब सरकारी जिला मुख्य चिकित्सालय में चिकित्सको के कथित परामर्श पर विभिन्न प्रकार की जांच कराने वाले रोगियो एवं उनके परिजनो को यदि ततपी धूप में पूरा बदन गीला देख कर आपको यह अंदाज लगाना मुश्कील हो जाएगा कि वह पसीने से गीला हुआ हैं या फिर मंहगी हुई जांच के चलते उसकी पतलून गिली हो गई हैं। बैतूल जिले में मौजूदा समय में रोगियो एवं उसके परिजनो को अपनी जेबें पहले से ज्यादा हल्की करनी पड़ेगी। तथाकथित महंगाई का बहाना करके बहुचर्चित एवं विवादो से घिरी रोगी कल्याण समिति ने जिला चिकित्सालय में होनी वाली विभिन्न प्रकार उपयोगी एवं अनुउपयोगी जांचों की दरें अचानक बढ़ा कर दुबले पर दो असाढ़ लाने वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया हैं। खबर लिखे जाने तक जिला मुख्य चिकित्सालय में बढ़ी हुई दरें लागू हो जाएगी। एक जानकारी के अनुसार बैतूल जिला चिकित्सालय में डाक्टर रोगी का रोग जाने बिना ही उसे विभिन्न प्रकार की जांच की पर्ची थमा देता हैं। जिला चिकित्सालय की ओपीडी में इलाज करने आने वाले रोगियो को डयूटी डॉक्टर द्वारा ना – ना प्रकार की जांच की सलाह दी जाती हैं। जिसके चलते रोगियो एवं उनके परिजनो को जांच कराने में अपनी जेबें पहले से ज्यादा ढ़ीली करनी पड़ेगी। कथित महंगाई का रोना रोते हुए रोगी कल्याण समिति अब रोगियो को ही रूलाने पर लगी हैं। रोगी कल्याण समिति द्वारा यह तर्क दिया जा रहा हैं कि काफी समय से जिला चिकित्सालय में होने वाली जांचों और एक्स-रे की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी। इस बार हुई रोगी कल्याण समिति की बैठक में इस पर चर्चा की गई और समिति के निर्णय पर जांच के लगने वाले शुल्क में बढ़ोतरी कर दी गई। अब बढ़ी हुई दर के आधार पर मरीजों को जांच का शुल्क अदा करना पड़ेगा।

जमीन के विवाद में भावी कांग्रेस जिलाध्यक्ष पर मुकदमा दर्ज
बैतूल, रामकिशोर पंवार: बैतूल जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं भावी कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष अरूण गोठी पर जमीन के विवाद में एक युवक की हत्या के प्रयास का आरोप लगा हैं। बताया जाता हैं कि पुलिस द्वारा नामजद आरोपी बनाए गए तीन लोगों ने मिलकर एक युवक को चाकू मार दिया। युवक को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती किया है। पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि टिकारी निवासी राजकुमार वर्मा दोपहर में जमीन का नाप कर रहे थे। मौके पर शिरीष वर्मा भी पहुंच गए। दोनों में जमीन को लेकर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। शिरीष को तीन लोगों ने मिलकर चाकू मारकर घायल कर दिया। पुलिस ने घायल की रिपोर्ट पर कांग्रेस नेता एवं जिला कांग्रेस महामंत्री अरूण गोठी, राजकुमार वर्मा और प्रभाकर बारस्कर पर मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि मारपीट में राजकुमार को भी अंदरूनी चोटें आई है। राजकुमार भी एमएलसी कराने अस्पताल पहुंंच गए हैं। हालाकि पुलिस ने दो पक्षो की रिर्पोट पर प्रकरण दर्ज किया हैं। पूरे मामले को यदि तूल नहीं मिलता यदि अरूण गोठी कांग्रेस के भावी जिलाध्यक्ष की कतार में अव्वल नम्बर पर नही होते। श्री गोठी के विरोधियो द्वारा पूरे मामले को तूल देकर इस प्रकरण को बढ़ा – चढ़ा कर पेश करने का आरोप लगाते हुए अरूण गोठी ने बताया कि उसे बेवजह इस प्रकरण में घसीटा जा रहा हैं।

बैतूल जिले में 1320 पुस्तकालय खुल गए
1 करोड़ 25 लाख 40 हजार रुपए की राशि खर्च की थी।
बैतूल, रामकिशोर पंवार: बैतूल जिले में शिक्षा का अधिकार कानून के तहत जिले के ग्रामीण अंचलों में सतत् शिक्षा को बढ़ावा देनें के लिए खोले गए कथित पुस्तकालय लगा ताला बरसो से खुला ही नही और1 करोड़ 25 लाख 40 हजार रुपए की राशि खर्च हो गई। वर्ष 2003 में राजस्व ग्रामों में कथित रूप से खोले गए ग्रामीण पुस्तकालय कुछ ही दिनों में बंद हो गए। पुस्तकालय के लिए खरीदी गई पुस्तकें और अन्य सामान भी गधे के सिंग की गायब हो गए हैं। इन फर्जी पुस्तकालयों के लिए खरीदा गया सामान आखिर कहां गया यह बताने को कोई तैयार नही हैं। कई गांवो की तो यह स्थिति हैं कि ग्रामीणो को यह सुन कर आश्चर्य होता हैं कि उसके गांव में कोई पुस्तकालय भी खुला था…? भाजपा सरकार के ग्राम पंचायती राज्य का कड़वा सच यह हैं कि जिले के 60 प्रतिशत से अधिक गांवो में पुस्तकालय खुला ही नही गया और सरकारी विभाग ने 1 करोड़ 25 लाख 40 हजार रुपए की राशि खर्च कर डाली। ग्रामीण क्षेत्रो में कथित पुस्तकालयस क्यों बंद है इसकी सुध न तो जनपद शिक्षा केंद्र ने ली और न ही जनप्रतिनिधियों ने ली है। सबसे मजेदार बात तो यह हैं कि ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिवो को भी पता नहीं हैं कि उसके गांव में कब कौन सा पुस्तकालय खुला था…? सरकारी आकड़ो की बाजीगरी देखिए कि सरकार ने आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले में 1320 पुस्तकालय खोले जिनकी बकायदा सूचि तक बनाई गई। इन सभी पुस्तकालयों पर सरकार 1 करोड़ 25 लाख 40 हजार रुपए खर्च भी हो गया और गांव में एक भी पुस्तक नहीं पहुंची। इतनी मोटी रकम खर्च करने के बाद भी गांव में कथित पुस्तकालय सरकारी रिकार्ड में अब ग्रामीणो की अरूचि के चलते बंद हो चुके है। इनकी निगरानी का दायित्व संभाल रहे जिला और जनपद शिक्षा केंद्रों की नींद महालेखाकार कार्यालय ग्वालियर के अधिकारियों के उस पत्र से खुली जिसमें पुस्तकालयो की मौजूदा स्थिति से अवगत कराने को कहा गया हैं। उक्त फरमान के जारी होने पर आनन फानन में जिला शिक्षा केंद्र ने सभी जनपद प्रभारियों से ग्रामीण पुस्तकालय के उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगे तो लिए लेकिन अभी तक किसी भी कथित पुस्तकालयों के अधिक्षको की ओर से न तो जानकारी उपलब्ध करवाई गई और न ही उस संदर्भ में कोई प्रमाण पत्र दिया गया। पुस्तकालय के संचालन के लिए नियुक्ति प्रेरकों को भी बीते सात वर्षो से कथित 5 सौ रूपए का मानदेय भी नहीं दिया गया और पूरे 1 करोड़ 25 लाख 40 हजार रुपए स्वाह हो गए।

छी ….. साले नहाते धोते भी नहीं हैं…..?
हाई प्रो फाइल स्कूलो ने दिखाया शिक्षा के अधिकार कानून को ठेंगा
बैतूल, रामकिशोर पंवार: भले ही भारत सरकार और राज्य सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 12 के तहत प्राइवेट स्कूलों में कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25 फीसदी सीट आरक्षित करने की बाते करती रही लेकिन शेर और सियार एक साथ एक ही तालाब का पानी पी ले ऐसा संभव भी नही हैं। बैतूल जिला कलेक्टर आनन – फानन में जिले के नीजी स्कूलो संचालकों की क्लास लेकर उन्हे कहा कि वे शहर के भग्गूढाना, ओझाढाना, अर्जुननगर, मांझी नगर, रामनगर और पारधी डेरे के बच्चों को शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों में पढऩे का मौका देवे। कई दिनो से बिना नहाते , धोते , गंदे , फटेहाल , भूखे , नंगे बच्चों को देख कर स्कूल संचालको ने वैसे भी पहले से अपनी नाके सिकोड़ रखी हैं। अब वे सरकारी फरमान पर अपनी पूरी तरह से आंखे मीच ली है। ऐसे स्कूल संचालको को पता हैं कि राजा भोज और नंगू तेली के बच्चो को एक साथ एक ही बैंच पर कैसे पढ़ाया जा सकता हैं। कलैक्टर ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 12 के तहत वंचित समूह और कमजोर वर्ग के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन देने के लिए स्कूल संचालकों ढेर सारी हिादयतें तो दी लेकिन शहर के जनप्रतिनिधियों , नेताओं , पंूजीपतियों के कमाऊपूत मंहगे स्कूलो में ऐसे बच्चों को एडीशन देने की हामी तो भर ली गई लेकिन उन्होने पिछले साल की तरह इस साल भी स्कूल के दरवाजे ऐसे लोगो के लिए पूरी तरह बंद रखने का मन बना रखा हैं। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कोई भी जिले में संचालित निजी स्कूलों के संचालकों द्वारा बीते शिक्षा सत्र में पांच ऐसे छात्रो को प्रवेश देकर उन्हे पढ़ाने की ठोस जानकारी नही उपलब्ध करवाई गई। कहने को जिला कलैक्टर ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम की जानकारी देने के लिए सभी स्कूलो के संचालको को बुलाया गया था। इस बैठक में लगभग दो सौ से अधिक स्कूलों के संचालक और प्राचार्य शामिल हुए। जिला शिक्षा केंद्र के सहायक समन्वयक केके वर्मा ने अधिनियम की जानकारी दी। श्री वर्मा ने बताया कि विमुक्त समूह की 8 जातियों के बच्चे, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जाति, वनग्राम के पट्टेधारी, 40 प्रतिशत से अधिक नि:शक्त बच्चे, कमजोर वर्ग से बीपीएल परिवार के बच्चे। अधिनियम के तहत प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के लिए अधिनियम के तहत निर्धारित प्रपत्र में आवेदन भरकर स्कूल प्राचार्य को देना होगा। स्कूल के संचालको को राहत देने के लिए आवेदन सशर्त मिलेगा जिसके लिए आवेदक के बीपीएल कार्ड, मतदाता परिचय पत्र, राशनकार्ड, भू:अधिकार पुस्तिका, मनरेगा का जॉब कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, बिजली बिल, पानी का बिल, निवास का प्रमाण पत्र आदि देना होगा। अब सवाल यह उठता हैं कि जब प्रशासन को यह मालूम हैं कि 8 प्रकार विमुक्त जनजाति के लोगो के पास डायविंग लायसेंस , पानी का या बिजली का बिल कहां से आयेगा…? प्रशासन ने यह कहीं से कहीं तक निर्देश नहीं दिया कि एक भी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर उसे जिले के मंहगे स्कूलो में एडमिशन मिल जाएगा। सशर्त एडमिशन पर स्कूल संचालको की चंादी हो गई क्योकि उन्हे मालूम हैं कि 25 प्रतिशत तो क्या 2 प्रतिशत लोगो के पास आवश्क्य दस्तावेज नहीं उपलब्ध हो सकेगें।

युवक कांग्रेस का चुनावी महासंग्राम शुरू
नीरज डागा और राज कुमार दिवान के बीच संघर्ष
बैतूल,रामकिशोर पंवार: बहुप्रतिक्षित जिला युवक कांग्रेस चुनाव में एक बार फिर कथित पूंजीपति और आम आदमी की लड़ाई बता कर इस चुनाव को दिलचस्प बनाने का प्रयास किया जा रहा हैं। जिले के पूर्व विधायक विनोद डागा के पुत्र एवं जिले के प्रमुख उद्योगपति नीरज डागा एवं पूर्व जिला युवक कांग्रेस के अध्यक्ष राज कुमार दिवान के बीच कड़ा मुकाबला होना हैं। जहां एक ओर डागा विरोधी गुट इसे अगड़े और पिछड़े की लड़ाई बता कर अपनी सहानुभूति बटोरने में जुट गसया हैं। सेठ जी को विधान सभा में निपटाया अब बेटे की बारी हैं इस मूल सिद्धांत पर जिले के सभी पिछड़े बाहुल्य कांग्रेसी नेता राज कुमार दिवान की दिवानी को बचाने में लगे हुए हैं। बैतूल जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में आखरी दिन 570 वार्ड एवं पंचायतों के लिए करीब 1506 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। लोकसभा रिटर्निग ऑफिसर सुरेंद्र शर्मा के अनुसार सर्वाधिक नामांकन 569 बैतूल विधानसभा में दाखिल हुए हैं जहां पर 119 सीटों पर चुनाव होंगे। वहीं सबसे कम नामांकन घोड़ाडोंगरी की 111 सीटों पर 184 उम्मीदवारों ने दाखिल किए हैं। भैंसदेही की 105 सीटों पर 268, आमला की 121 सीटों पर 277 एवं मुलताई की 114 सीटों पर 206 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। उन्होंने बताया कि इन नामांकनों की जांच के बाद 14 से 17 अप्रैल तक हर विधानसभा क्षेत्र में बनाए गए एक-एक पोलिंग सेंटर पर अलग-अलग चरणों में मतदान करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल के बाद द्वितीय चरण में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित की जाएगी। इसके अलावा बैतूल लोकसभा क्षेत्र में आने वाले हरदा विधानसभा क्षेत्र में 150 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। शर्मा के अनुसार युवाओं द्वारा उत्साह के साथ नामांकन दाखिल किया गया है। कभी कमलनाथ तो कभी दिग्गी राजा के विश्वास पात्र रहे जिले के पूर्व विधायक विनोद डागा का वैसे पूरे जिले में राजनैतिक प्रभाव किसी से छुपा नहीं हैं। आज भी सेठ जी के दरबार में अच्छे और बुरे सभी मतथा टेकने जाते हैं। ऐसे में डागा के संगी ही डागा के विरोधी की भूमिका निभा कर पता नहीं सेठ जी से किस जनम का बैर निभा रहे हैं। कुल मिला कर नीरज बाबू के चुनावी महासंग्राम में उतर जाने के बाद से पूरा शहर बैनर पोस्टरो से तो जरूर सच जायेगा लेकिन सही राज तिलक किसका होगा यह कहना अतीत के घेरे में हैं।

बैतूल में भी बहुचर्चित सचिन चिटकुले एण्ड कंपनी…?
बैतूल, रामकिशोर पंवार:  यदि आप बैतूल की सड़को पर पैदल या मोटर साइकिल चल रहे हो अचानक धड़ाम से आप गिर जाए या कोई गिर जाए तो उसे देख कर प्लीज हसना मत क्योकि बैतूल की सड़के जमीन पर आसमान के तारे के लिए ही बनवाई जाती हैं। लोगो का ऐसा मानना हैं कि अक्षय खन्ना की बहुचर्चित सचिन चिटकुले एण्ड कंपनी को ही बैतूल नगरपालिका पाल पोस कर धनवान कर रही हैं। जिले में क्या डामर क्या सीमेंट कांक्रीट से बनी सड़के सभी समय से पूर्व ही गडढ़ो में तबदील हो चुकी हैं। इमानदार और बेइमान अध्यक्षो के कार्यकाल में सब कुछ बदला और यदि कुछ नही बदला तो वह नगर पालिका की सड़को के बदहाल ..? नगरपालिका की चार से छह महीने में ही दम तोड़ती सड़कों की हालत को देखते हुए पार्षदों ने निर्माण प्रक्रिया में पार्षदों की सीधे भागीदारी को लेकर आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है। उनका ऐसा करना इसलिए भी जायज है क्योकि निमार्ण कोई भी करवाये लोग कमीशन खाने का आरोप तो पार्षद ही लगाते हैं ऐसे में खा पीकर यदि बदनाम हो तो अच्छा हैं। एक खोज का विषय यह हैं कि आपको जिला मुख्यालय के 33 वार्ड में यदि पिछले दस साल पहले बनी सड़क ज्यो की त्यों मिल जाए तो मान लो कि आपने आसमान में सुराख कर दिया हैं। नगर की सीमेंट कांक्रीट की रोड सचिन चिटकुले एण्ड कंपनी के कारनामों की कहानियां बयां करती हुई नजर आएगी। कहीं पर सड़कों में दरारें आ गई है तो कहीं पर सड़क से ऊपर की परत ही गायब हो चुकी है। नगर की सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे भी बारिश के मौसम में पोखर – तालाब की शक्ल में नजर आते हैं। सड़कों की इस दुर्दशा को लेकर यही आरोप सामने आते हैं कि जब 40 परसेंट कमीशन होगा तो सड़कों में गुणवत्ता कहां से आएगी..? दबी जुबान में ठेकेदार भी नपा में व्याप्त कमीशनबाजी को लेकर यहीं कहते हैं कि परिषद किसी भी पार्टी की हो लेकिन यहां तो कुर्सी का कमीशन स्थाई रूप से फिक्स है जो देना ही पड़ता हैं।

बालिका की संदिग्ध मौत

सारणी , बैतूल: सुभाष नगर में रविवार को एक बालिका का शव अपने घर मे फांसी पर लटका मिला है। बालिका के हत्या की आशंका जताई जा रही है। 11 वर्षीय शारदा पिता शंकर साहू का शव अपने ही घर में फांसी पर लटका मिला है। मृतक बालिका घर अकेली थी। मां मजदूरी पर गई थी। पिता बैतूल में रहकर मजदूरी करता है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

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BETUL SAMACHAR

रोगी कल्याण समिति बनी लूट खसोट समिति
अब जांच के बहाने रोगियो के परिजनो की जेब पर डाका
बैतूल, रामकिशोर पंवार: कहने को तो उसे रोगी कल्याण समिति कहा जाता हैं लेकिन वह रोगियो की कम सरकार की पक्षधर ज्यादा होती हैं। आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले में अब सरकारी जिला मुख्य चिकित्सालय में चिकित्सको के कथित परामर्श पर विभिन्न प्रकार की जांच कराने वाले रोगियो एवं उनके परिजनो को यदि ततपी धूप में पूरा बदन गीला देख कर आपको यह अंदाज लगाना मुश्कील हो जाएगा कि वह पसीने से गीला हुआ हैं या फिर मंहगी हुई जांच के चलते उसकी पतलून गिली हो गई हैं। बैतूल जिले में मौजूदा समय में रोगियो एवं उसके परिजनो को अपनी जेबें पहले से ज्यादा हल्की करनी पड़ेगी। तथाकथित महंगाई का बहाना करके बहुचर्चित एवं विवादो से घिरी रोगी कल्याण समिति ने जिला चिकित्सालय में होनी वाली विभिन्न प्रकार उपयोगी एवं अनुउपयोगी जांचों की दरें अचानक बढ़ा कर दुबले पर दो असाढ़ लाने वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया हैं। खबर लिखे जाने तक जिला मुख्य चिकित्सालय में बढ़ी हुई दरें लागू हो जाएगी। एक जानकारी के अनुसार बैतूल जिला चिकित्सालय में डाक्टर रोगी का रोग जाने बिना ही उसे विभिन्न प्रकार की जांच की पर्ची थमा देता हैं। जिला चिकित्सालय की ओपीडी में इलाज करने आने वाले रोगियो को डयूटी डॉक्टर द्वारा ना – ना प्रकार की जांच की सलाह दी जाती हैं। जिसके चलते रोगियो एवं उनके परिजनो को जांच कराने में अपनी जेबें पहले से ज्यादा ढ़ीली करनी पड़ेगी। कथित महंगाई का रोना रोते हुए रोगी कल्याण समिति अब रोगियो को ही रूलाने पर लगी हैं। रोगी कल्याण समिति द्वारा यह तर्क दिया जा रहा हैं कि काफी समय से जिला चिकित्सालय में होने वाली जांचों और एक्स-रे की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी। इस बार हुई रोगी कल्याण समिति की बैठक में इस पर चर्चा की गई और समिति के निर्णय पर जांच के लगने वाले शुल्क में बढ़ोतरी कर दी गई। अब बढ़ी हुई दर के आधार पर मरीजों को जांच का शुल्क अदा करना पड़ेगा।

जमीन के विवाद में भावी कांग्रेस जिलाध्यक्ष पर मुकदमा दर्ज
बैतूल, रामकिशोर पंवार: बैतूल जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं भावी कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष अरूण गोठी पर जमीन के विवाद में एक युवक की हत्या के प्रयास का आरोप लगा हैं। बताया जाता हैं कि पुलिस द्वारा नामजद आरोपी बनाए गए तीन लोगों ने मिलकर एक युवक को चाकू मार दिया। युवक को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती किया है। पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि टिकारी निवासी राजकुमार वर्मा दोपहर में जमीन का नाप कर रहे थे। मौके पर शिरीष वर्मा भी पहुंच गए। दोनों में जमीन को लेकर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। शिरीष को तीन लोगों ने मिलकर चाकू मारकर घायल कर दिया। पुलिस ने घायल की रिपोर्ट पर कांग्रेस नेता एवं जिला कांग्रेस महामंत्री अरूण गोठी, राजकुमार वर्मा और प्रभाकर बारस्कर पर मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि मारपीट में राजकुमार को भी अंदरूनी चोटें आई है। राजकुमार भी एमएलसी कराने अस्पताल पहुंंच गए हैं। हालाकि पुलिस ने दो पक्षो की रिर्पोट पर प्रकरण दर्ज किया हैं। पूरे मामले को यदि तूल नहीं मिलता यदि अरूण गोठी कांग्रेस के भावी जिलाध्यक्ष की कतार में अव्वल नम्बर पर नही होते। श्री गोठी के विरोधियो द्वारा पूरे मामले को तूल देकर इस प्रकरण को बढ़ा – चढ़ा कर पेश करने का आरोप लगाते हुए अरूण गोठी ने बताया कि उसे बेवजह इस प्रकरण में घसीटा जा रहा हैं।

बैतूल जिले में 1320 पुस्तकालय खुल गए
1 करोड़ 25 लाख 40 हजार रुपए की राशि खर्च की थी।
बैतूल, रामकिशोर पंवार: बैतूल जिले में शिक्षा का अधिकार कानून के तहत जिले के ग्रामीण अंचलों में सतत् शिक्षा को बढ़ावा देनें के लिए खोले गए कथित पुस्तकालय लगा ताला बरसो से खुला ही नही और1 करोड़ 25 लाख 40 हजार रुपए की राशि खर्च हो गई। वर्ष 2003 में राजस्व ग्रामों में कथित रूप से खोले गए ग्रामीण पुस्तकालय कुछ ही दिनों में बंद हो गए। पुस्तकालय के लिए खरीदी गई पुस्तकें और अन्य सामान भी गधे के सिंग की गायब हो गए हैं। इन फर्जी पुस्तकालयों के लिए खरीदा गया सामान आखिर कहां गया यह बताने को कोई तैयार नही हैं। कई गांवो की तो यह स्थिति हैं कि ग्रामीणो को यह सुन कर आश्चर्य होता हैं कि उसके गांव में कोई पुस्तकालय भी खुला था…? भाजपा सरकार के ग्राम पंचायती राज्य का कड़वा सच यह हैं कि जिले के 60 प्रतिशत से अधिक गांवो में पुस्तकालय खुला ही नही गया और सरकारी विभाग ने 1 करोड़ 25 लाख 40 हजार रुपए की राशि खर्च कर डाली। ग्रामीण क्षेत्रो में कथित पुस्तकालयस क्यों बंद है इसकी सुध न तो जनपद शिक्षा केंद्र ने ली और न ही जनप्रतिनिधियों ने ली है। सबसे मजेदार बात तो यह हैं कि ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिवो को भी पता नहीं हैं कि उसके गांव में कब कौन सा पुस्तकालय खुला था…? सरकारी आकड़ो की बाजीगरी देखिए कि सरकार ने आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले में 1320 पुस्तकालय खोले जिनकी बकायदा सूचि तक बनाई गई। इन सभी पुस्तकालयों पर सरकार 1 करोड़ 25 लाख 40 हजार रुपए खर्च भी हो गया और गांव में एक भी पुस्तक नहीं पहुंची। इतनी मोटी रकम खर्च करने के बाद भी गांव में कथित पुस्तकालय सरकारी रिकार्ड में अब ग्रामीणो की अरूचि के चलते बंद हो चुके है। इनकी निगरानी का दायित्व संभाल रहे जिला और जनपद शिक्षा केंद्रों की नींद महालेखाकार कार्यालय ग्वालियर के अधिकारियों के उस पत्र से खुली जिसमें पुस्तकालयो की मौजूदा स्थिति से अवगत कराने को कहा गया हैं। उक्त फरमान के जारी होने पर आनन फानन में जिला शिक्षा केंद्र ने सभी जनपद प्रभारियों से ग्रामीण पुस्तकालय के उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगे तो लिए लेकिन अभी तक किसी भी कथित पुस्तकालयों के अधिक्षको की ओर से न तो जानकारी उपलब्ध करवाई गई और न ही उस संदर्भ में कोई प्रमाण पत्र दिया गया। पुस्तकालय के संचालन के लिए नियुक्ति प्रेरकों को भी बीते सात वर्षो से कथित 5 सौ रूपए का मानदेय भी नहीं दिया गया और पूरे 1 करोड़ 25 लाख 40 हजार रुपए स्वाह हो गए।

छी ….. साले नहाते धोते भी नहीं हैं…..?
हाई प्रो फाइल स्कूलो ने दिखाया शिक्षा के अधिकार कानून को ठेंगा
बैतूल, रामकिशोर पंवार: भले ही भारत सरकार और राज्य सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 12 के तहत प्राइवेट स्कूलों में कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25 फीसदी सीट आरक्षित करने की बाते करती रही लेकिन शेर और सियार एक साथ एक ही तालाब का पानी पी ले ऐसा संभव भी नही हैं। बैतूल जिला कलेक्टर आनन – फानन में जिले के नीजी स्कूलो संचालकों की क्लास लेकर उन्हे कहा कि वे शहर के भग्गूढाना, ओझाढाना, अर्जुननगर, मांझी नगर, रामनगर और पारधी डेरे के बच्चों को शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों में पढऩे का मौका देवे। कई दिनो से बिना नहाते , धोते , गंदे , फटेहाल , भूखे , नंगे बच्चों को देख कर स्कूल संचालको ने वैसे भी पहले से अपनी नाके सिकोड़ रखी हैं। अब वे सरकारी फरमान पर अपनी पूरी तरह से आंखे मीच ली है। ऐसे स्कूल संचालको को पता हैं कि राजा भोज और नंगू तेली के बच्चो को एक साथ एक ही बैंच पर कैसे पढ़ाया जा सकता हैं। कलैक्टर ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 12 के तहत वंचित समूह और कमजोर वर्ग के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन देने के लिए स्कूल संचालकों ढेर सारी हिादयतें तो दी लेकिन शहर के जनप्रतिनिधियों , नेताओं , पंूजीपतियों के कमाऊपूत मंहगे स्कूलो में ऐसे बच्चों को एडीशन देने की हामी तो भर ली गई लेकिन उन्होने पिछले साल की तरह इस साल भी स्कूल के दरवाजे ऐसे लोगो के लिए पूरी तरह बंद रखने का मन बना रखा हैं। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कोई भी जिले में संचालित निजी स्कूलों के संचालकों द्वारा बीते शिक्षा सत्र में पांच ऐसे छात्रो को प्रवेश देकर उन्हे पढ़ाने की ठोस जानकारी नही उपलब्ध करवाई गई। कहने को जिला कलैक्टर ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम की जानकारी देने के लिए सभी स्कूलो के संचालको को बुलाया गया था। इस बैठक में लगभग दो सौ से अधिक स्कूलों के संचालक और प्राचार्य शामिल हुए। जिला शिक्षा केंद्र के सहायक समन्वयक केके वर्मा ने अधिनियम की जानकारी दी। श्री वर्मा ने बताया कि विमुक्त समूह की 8 जातियों के बच्चे, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जाति, वनग्राम के पट्टेधारी, 40 प्रतिशत से अधिक नि:शक्त बच्चे, कमजोर वर्ग से बीपीएल परिवार के बच्चे। अधिनियम के तहत प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के लिए अधिनियम के तहत निर्धारित प्रपत्र में आवेदन भरकर स्कूल प्राचार्य को देना होगा। स्कूल के संचालको को राहत देने के लिए आवेदन सशर्त मिलेगा जिसके लिए आवेदक के बीपीएल कार्ड, मतदाता परिचय पत्र, राशनकार्ड, भू:अधिकार पुस्तिका, मनरेगा का जॉब कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, बिजली बिल, पानी का बिल, निवास का प्रमाण पत्र आदि देना होगा। अब सवाल यह उठता हैं कि जब प्रशासन को यह मालूम हैं कि 8 प्रकार विमुक्त जनजाति के लोगो के पास डायविंग लायसेंस , पानी का या बिजली का बिल कहां से आयेगा…? प्रशासन ने यह कहीं से कहीं तक निर्देश नहीं दिया कि एक भी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर उसे जिले के मंहगे स्कूलो में एडमिशन मिल जाएगा। सशर्त एडमिशन पर स्कूल संचालको की चंादी हो गई क्योकि उन्हे मालूम हैं कि 25 प्रतिशत तो क्या 2 प्रतिशत लोगो के पास आवश्क्य दस्तावेज नहीं उपलब्ध हो सकेगें।

युवक कांग्रेस का चुनावी महासंग्राम शुरू
नीरज डागा और राज कुमार दिवान के बीच संघर्ष
बैतूल,रामकिशोर पंवार: बहुप्रतिक्षित जिला युवक कांग्रेस चुनाव में एक बार फिर कथित पूंजीपति और आम आदमी की लड़ाई बता कर इस चुनाव को दिलचस्प बनाने का प्रयास किया जा रहा हैं। जिले के पूर्व विधायक विनोद डागा के पुत्र एवं जिले के प्रमुख उद्योगपति नीरज डागा एवं पूर्व जिला युवक कांग्रेस के अध्यक्ष राज कुमार दिवान के बीच कड़ा मुकाबला होना हैं। जहां एक ओर डागा विरोधी गुट इसे अगड़े और पिछड़े की लड़ाई बता कर अपनी सहानुभूति बटोरने में जुट गसया हैं। सेठ जी को विधान सभा में निपटाया अब बेटे की बारी हैं इस मूल सिद्धांत पर जिले के सभी पिछड़े बाहुल्य कांग्रेसी नेता राज कुमार दिवान की दिवानी को बचाने में लगे हुए हैं। बैतूल जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में आखरी दिन 570 वार्ड एवं पंचायतों के लिए करीब 1506 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। लोकसभा रिटर्निग ऑफिसर सुरेंद्र शर्मा के अनुसार सर्वाधिक नामांकन 569 बैतूल विधानसभा में दाखिल हुए हैं जहां पर 119 सीटों पर चुनाव होंगे। वहीं सबसे कम नामांकन घोड़ाडोंगरी की 111 सीटों पर 184 उम्मीदवारों ने दाखिल किए हैं। भैंसदेही की 105 सीटों पर 268, आमला की 121 सीटों पर 277 एवं मुलताई की 114 सीटों पर 206 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। उन्होंने बताया कि इन नामांकनों की जांच के बाद 14 से 17 अप्रैल तक हर विधानसभा क्षेत्र में बनाए गए एक-एक पोलिंग सेंटर पर अलग-अलग चरणों में मतदान करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल के बाद द्वितीय चरण में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित की जाएगी। इसके अलावा बैतूल लोकसभा क्षेत्र में आने वाले हरदा विधानसभा क्षेत्र में 150 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। शर्मा के अनुसार युवाओं द्वारा उत्साह के साथ नामांकन दाखिल किया गया है। कभी कमलनाथ तो कभी दिग्गी राजा के विश्वास पात्र रहे जिले के पूर्व विधायक विनोद डागा का वैसे पूरे जिले में राजनैतिक प्रभाव किसी से छुपा नहीं हैं। आज भी सेठ जी के दरबार में अच्छे और बुरे सभी मतथा टेकने जाते हैं। ऐसे में डागा के संगी ही डागा के विरोधी की भूमिका निभा कर पता नहीं सेठ जी से किस जनम का बैर निभा रहे हैं। कुल मिला कर नीरज बाबू के चुनावी महासंग्राम में उतर जाने के बाद से पूरा शहर बैनर पोस्टरो से तो जरूर सच जायेगा लेकिन सही राज तिलक किसका होगा यह कहना अतीत के घेरे में हैं।

बैतूल में भी बहुचर्चित सचिन चिटकुले एण्ड कंपनी…?
बैतूल, रामकिशोर पंवार:  यदि आप बैतूल की सड़को पर पैदल या मोटर साइकिल चल रहे हो अचानक धड़ाम से आप गिर जाए या कोई गिर जाए तो उसे देख कर प्लीज हसना मत क्योकि बैतूल की सड़के जमीन पर आसमान के तारे के लिए ही बनवाई जाती हैं। लोगो का ऐसा मानना हैं कि अक्षय खन्ना की बहुचर्चित सचिन चिटकुले एण्ड कंपनी को ही बैतूल नगरपालिका पाल पोस कर धनवान कर रही हैं। जिले में क्या डामर क्या सीमेंट कांक्रीट से बनी सड़के सभी समय से पूर्व ही गडढ़ो में तबदील हो चुकी हैं। इमानदार और बेइमान अध्यक्षो के कार्यकाल में सब कुछ बदला और यदि कुछ नही बदला तो वह नगर पालिका की सड़को के बदहाल ..? नगरपालिका की चार से छह महीने में ही दम तोड़ती सड़कों की हालत को देखते हुए पार्षदों ने निर्माण प्रक्रिया में पार्षदों की सीधे भागीदारी को लेकर आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है। उनका ऐसा करना इसलिए भी जायज है क्योकि निमार्ण कोई भी करवाये लोग कमीशन खाने का आरोप तो पार्षद ही लगाते हैं ऐसे में खा पीकर यदि बदनाम हो तो अच्छा हैं। एक खोज का विषय यह हैं कि आपको जिला मुख्यालय के 33 वार्ड में यदि पिछले दस साल पहले बनी सड़क ज्यो की त्यों मिल जाए तो मान लो कि आपने आसमान में सुराख कर दिया हैं। नगर की सीमेंट कांक्रीट की रोड सचिन चिटकुले एण्ड कंपनी के कारनामों की कहानियां बयां करती हुई नजर आएगी। कहीं पर सड़कों में दरारें आ गई है तो कहीं पर सड़क से ऊपर की परत ही गायब हो चुकी है। नगर की सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे भी बारिश के मौसम में पोखर – तालाब की शक्ल में नजर आते हैं। सड़कों की इस दुर्दशा को लेकर यही आरोप सामने आते हैं कि जब 40 परसेंट कमीशन होगा तो सड़कों में गुणवत्ता कहां से आएगी..? दबी जुबान में ठेकेदार भी नपा में व्याप्त कमीशनबाजी को लेकर यहीं कहते हैं कि परिषद किसी भी पार्टी की हो लेकिन यहां तो कुर्सी का कमीशन स्थाई रूप से फिक्स है जो देना ही पड़ता हैं।

बालिका की संदिग्ध मौत

सारणी , बैतूल: सुभाष नगर में रविवार को एक बालिका का शव अपने घर मे फांसी पर लटका मिला है। बालिका के हत्या की आशंका जताई जा रही है। 11 वर्षीय शारदा पिता शंकर साहू का शव अपने ही घर में फांसी पर लटका मिला है। मृतक बालिका घर अकेली थी। मां मजदूरी पर गई थी। पिता बैतूल में रहकर मजदूरी करता है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

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