‘आखिर कहां खो गये अलगू चौधरी और जुम्मन शेख ..!”


रामकिशोर पंवार ”रोंढ़ावाला ”
हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक स्वर्गीय मुंशी प्रेमचंद की एक कथा ”पंच परमेश्वर” और ”बुढ़ी काकी”  मैने बचपन में कक्षा तीसरी में पढ़ी थी। उस समय की कथा के पात्रो को लेकर व्यक्त की गई कथाकार की प्रस्तुति तो लगभग भूल गया लेकिन याद रह गये अलगू चौधरी और जुम्मन शेख और बुढ़ी काकी जिसे मैं भारत के उन गांवो में खोजता चला आ रहा हँू जो कि पंचायती राज्य के चक्कर में कहीं उन पात्रो का कफन – दफन कर चुके है। मेरा गांव में ही मैं आज भी जुम्मन शेख को खोज रहा हँू लेकिन लगभग आधा सैकड़ा होने को आई इस उम्र में भी मुझे जुम्मन शेख नहीं मिला। मेरे गांव में अलगू चौधरी की जगह केशो चौधरी और उसके बाद ढिल्लन चौधरी तो मिल गये लेकिन पंच परमेश्वर के कहीं दर्शन तक नहीं हो रहे है। गांव की चौपाल भी टूट चुकी है। अब पंच परमेश्वर गांव की चौपाल पर नहीं एक बंद कमरे में कुर्सी पर बैठ कर गुपचुप फैसला करने लगे है। पहले गांव के पंच परमेश्वर का फैसला सर्वमान्य था लेकिन अब तो फैसला लेने के पहले और बाद में भी सिर्फ हंगामा होने लगा है। गांव के पंच और परमेश्वर दोनो ही लापतागंज की तरह लापता हो चुके है जिसके चलते गांव के फैसले गांव में तय होने के बजाय अब कोर्ट – कचहरी तक जाने लगे है। सर्वोदयी गांव में जगह संत टुकड़ो जी महाराज के सुखद सपने का सुर्यास्त हो चुका है। अब तो गांव में चिडिय़ो की चहचहाट भी मोबाइल टावर के नेटवर्क की तरह कभी – कभी धड़ – पकड़ करती सुनने को मिल जाती है। पूरी तरह गांवो की गायब पगडंडियो की जगह सीमेंट काक्रिंट होने लगी गलियो में अब गांव का पंचायती राज कमाऊपूत बेटा बन गया है जिसका जिसने भी नमक खाया वह या तो नालायक निकल गया या फिर नमक हराम …….. ऐसे में गांवो के सर्वागिण विकास का सुखद सपना बापू के आजाद भारत के सुर्योदय के साथ ही न जाने कब अस्त हो गया। भगवा सरकार के भगवा रंगीन माहौल में मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले के गांवो में पंचायती राज की बाते जोर – शोर के साथ कहीं एवं सुनी जाती है। प्रदेश के मुखिया शिवराज के स्वराज और सुराज के साथ ग्रामराज में एक बार फिर गांवो के विवादो के निपटारे के लिए ग्राम न्यायालय की भी सुखद परिकल्पना की जा रही है। ऐसे में क्या गांव की खाला को सहीं न्याय दिलवाने में अलगू चौधरी अव्वल नम्बर पर रहेगा या फिर वह भी मौजूदा हाल का शिकार बन जायेगा। जिस प्रदेश के गांवो में जाबकार्ड पर जब बेरोजगारो को ठीक ढंग से सौ दिन का रोजगार तथा राशन की दुकान पर घर के दीये के लिए मिटटी का तेल तक नहीं मिल पाता वहां पर जुम्मन शेख से पंच परमेश्वर बनने के बाद सही न्याय मिलने की संभावनायें कहीं से कहीं तक नज़र नहीं आती है। आज गांव का अलगू चौधरी और जुम्मन शेख पंच बनने के लिए हजारो रूपैया पानी की तरह बहा कर चुनाव जीत जाते है ऐसे में उनसे जनसेवा – परोपकार की अपेक्षा रखना अपने आप को धोखा देना जैसा संगीन अपराध कहलायेगा। पंच के चुनाव में जब हजारो से लेकर लाखो तक खर्च होने लगे है तब गांव की सड़के और नालिया सब कुछ पंच की मनमर्जी के मुताबिक ही होगा अन्यथा सरपंच के खिलाफ जनसुनवाई से लेकर कोर्ट कचहरी तक के लिए दरवाजे खुले रहते है। गांवो से आज भी सरपंच एवं सचिवो तथा पंचो के खिलाफ शिकवा – शिकायतो का दौर नहीं थमा है। अब तो पूरा गांव ही अलगू चौधरी एवं जुम्मन शेख की साझेदारी – भागेदारी के खिलाफ आवाज उठाने लगे है। बैतूल जिले में 558 ग्राम पंचायतो के हजारो पंचो एवं सरपंचो तथा सचिवो की तथाकथित यूनियने – संगठन रोज किसी न किसी के पक्ष में ज्ञापन और विज्ञापन देते पूरे जिले में कहीं न कहीं अपनी ताकत दिखाते नज़र आ जायेगें। अब तो ऐसा लगने लगा है कि गांवो में केवल नेतागिरी की आड़ में अपने पापो को छुपाने का वही काम किया जा रहा है जो गांव की दाई पेट का पाप छुपाने का करती थी। गांव तो आज के समय में शीला की जवानी और टकसाल बनी मुन्नी की तरह बदनाम होने लगे है। ऐसे में गांवो के सर्वागिण विकास का स्वर्गीय मुन्नी भैया – बाबू जी का सपना पता नहीं कब साकार होगा। गांवो में कांग्रेस और भाजपा का राज नहीं है बल्कि राज है उन लोगो का जो कि सरकारी माल को हज़म करने में महारथ हासिल किये हुये है। मेरा जन्म भी एक छोटे से गांव में हुआ है। गांव से मेरी आत्मीयता के पीछे मेरा गांव में गड़ा नरा है जिसे आज के शहरी लोग समझ नहीं पाते है। दरअसल में नरा का मतलब वह नली से जिससे गर्भवति के पेट में पल रहे शीशु को आहार मिलता है। बच्चे के जन्म लेने के बाद गांव की दाई और शहर की नर्स उस नली को काट कर फेक देती है। गांवो में दाई उस नी को काट कर जमीन में गाड़ देती है। ऐसे में गांव से उन लोगो का लगाव जुड़ जाता है जिनका उस गांव में नरा गड़ा होता है। अकसर गांव के बुर्जग लोगो को ताना मारते समय यह कहते जरूर सुना होगा कि ” क्यों तेरा यहां पर नरा गड़ा है क्या…..?  अकसर लोग गांव को छोड़ कर शहरी चकाचौंध में खोते जा रहे है। ऐसे में मुंशी प्रेमचंद की बुढ़ी काकी और पंच परमेश्वर आपको कहीं भी ढुढऩे से नहीं मिलने वाले है। आज जरूरत है कि हम भले ही शहर में रहे लेकिन ऐसा वातावरण पैदा करे कि हर मोहल्ले में एक अलगू चौधरी और जुम्मन शेख हो जिसकी बाते सभी परमेश्वर की बात समझ कर माने ताकि शहरो में भी शांती कायम रहे है और लोगो का मानसिक तनाव कम हो सके। स्वर्गीय मुंशी प्रेमचंद को समर्पित यह लेख शायद कुछ लोगो को जरूर पसंद आयेगा।

धर्म संस्कृति
सूर्यपुत्री माँ ताप्ती की घाटियो में छुपी प्राचिन
सभ्यताओं का प्रतीक है ग्राम डोहलन
रिर्पोट :- रामकिशोर पंवार
मुलताई (बैतूल)। विश्व पटल पर देखने से पता चलता है कि अनेक सभ्याताओं का उदय और विनाश नदियों के किनारे हुआ है। विश्व की अनेक प्राचिन सभ्यता चाहे सिंधु घटी की सभ्यता हो या फिर किसी अन्य की प्राचिन सभ्यता इन सब की पोषक नदियाँ रही है। नदियो के किनारे जन्मी अनेक सभ्यताओं से जुड़े किस्से कहानियों में भारत की सबसे प्राचिन नदी सूर्य पुत्री माँ ताप्ती का भी नाम आता है। आज यही कारण है कि ताप्ती तटों पर प्राचीन समृद्ध सभ्यताओं के अवशेष अकसर बिना किसी खुदाई या खोज के अकसर लोगो का मिलते है। वास्तुकला के अमुल्य खजानों से ओत- प्रोत सूर्यपुत्री माँ ताप्ती के तटो पर मिलने वाले प्राचिन मठ – मंदिर एवं अवशेषो को देखते ही उसके प्राचिन इतिहास की फिलम इआँखो के सामने चलने लगती है। भारतीय पौराणिक एवं प्राचीन संस्कृति की अमोल धरोहर कही जाने वाली वास्तुकला एवं शिल्प कला की बेजोड़ मिशालें कहलाने वाली इन अद्धितीय कला कृतियों के निमार्ण के साथ – साथ इनके आज तक नष्ट न हुये सौंदर्य को देखते ही इस बात का अंदाजा उन अमीट साक्ष्यो से लगाया जा सकता है सदियों के बाद भी इन कला कृतियों का वैभव पूर्ण रूप से नष्ट होने की कगार पर आ जाने के बाद भी ए आज भी ज्यो – के त्यो खड़े अपने इतिहास के पन्नो में छपी कहानी – किस्सो को बयाँ करते है। कई बार समाचार पत्रो एवं जागरूक संगठनो की उलाहना के बाद हाल हीं में मध्य प्रदेश सरकार के पुरातत्व विभाग ने इनकी सुध लेने की दिशा में पहल करने का मन बनाया। वह इन प्राचिन भारत की अनमोल धरोहर की सुध लेने एवं इन्हें सहजने के लिए भोपाल से आदिवाससी बैतूल जिले की ओर निकल पड़ा है। भोपाल – नागपुर नेशनल हाइवे 69 पर स्थित बैतूल जिले की मुलताई तहसील मुख्यालय के दक्षिण में लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम डोहलन में स्थित प्राचीन ऋषि महाराज के मंदिर माता माई मंदिर का जीर्णोद्वार की सुगबगाहट में जुटा मध्यप्रदेश सरकार का पुरात्व महकमा ने इस गांव पहँुचने के बाद कुछ सार्थक कार्य प्रारंभ किया है। पुरातत्व विभाग द्वारा धार्मिक आस्था के प्रतीक और प्राचीन वास्तुकला की धरोहर को सहजनें का प्रयास किया जा रहा है। ऋषि महाराज का मंदिर अत्यंत प्राचीन है और मंदिर के चारों और पत्थर पर बनी कलाकृतियों आज भी सहज ही मन मोह लेती है। इस मंदिर पर दत्तात्र भगवान राम नटराज और मॉ काली की पत्थर की बनी प्रतिमाएॅ है साथ ही अनेक कलाकृतियों में युद्ध का वृतांत एवं नृत्य के भाव-भगीमा को दिखाया गया है। वहीं माता माई के मंदिर के समक्ष लगा द्वार पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियों का बेजोड़ नमूना है इस कलाकृती को देखकर प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति की समृद्धि का भान होता है। ग्राम डोहलन में जगह-जगह बिखरी पड़ी कलाकृतियों के रूप में सौंदर्य की प्रतिमाएॅं उत्कृष्ट कल्पनाओं का ऐसा संसार दिखाती है जिसे देख सहज ही मन विभोर हो जाता है। इस प्राचीन मंदिर को लेकर अनेक किस्से, कहानी और दंत कथाएॅं प्रचलित है।  ग्राम में जब भी कोई आपदा आती है तो ग्रामीण इस मंदिर में शरण लेते है और भक्ति भाव से की गई प्रार्थना के बाद लोगों का यह विश्वास है कि सभी आपदाएॅं टल जाती है। ग्रामिणो की आस्थायें कहती है कि गांव में चाहें कोई भी बीमारी का प्रकोप हो या अवर्षा की समस्या, ग्रामीण अपनी सभी समस्याओं का हल इसी मंदिर में खोजते है, लोगों का विश्वास है कि वर्षा ने होने पर ताप्ती का जल इस मंदिर में चढ़ाने से वर्षा हो जाती है। डोलहन ग्राम के लोगो की ऐसी मान्यता है कि इस गांव के प्राचिन इन मंदिरो का रिश्ता भगवान मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम के वनवास काल से जुडा है। इस गांव के मंदिर के प्राचीन इतिहास पर प्रकाश डालते हुए ग्रामिण बताते है कि यह मुनि विश्राम एवं रमण मुनि की तपों भूमि रही है। यहॉं मुनि मंदिर में विद्यमान शिव लिंग की पुजा किया करते थें, राजस्थान से आए उनके कुल भाटों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास आठ सौ सालों से भी अधिक पुराना है इस मंदिर से कभी कलांतर में पत्थरों की ही एक सीढ़ी हुआ करती थी, जो कि ताप्ती नदी के मध्य तक जाती थी, जिसके अवशेष आज भी ताप्ती तट पर देखे जा सकते है। ग्राम डोहलन वासियों का मानना है कि प्राचीन काल में यहाँ विशाल मंदिर रहा होगा। अनेक ग्रामीण कहते है वर्तमान में जो मंदिर दिखाई देता है इसके निचले भाग में विशाल मंदिर हो सकता है। जगह-जगह खड़े पत्थरों के आकर्षक खंबे इस विश्वास को पुख्ता करते है। ताप्ती नदी के मध्य बना चबूतरा सीढिय़ों के अवशेष एवं बावड़ी का अस्तित्व यह बताता है कि यहाँ कभी समृद्ध सभ्यता रही है, जिसें खोजे जाने की आवश्यक्ता है। बैतूल जिलें में पहली बार पुरातत्व विभाग भोपाल द्वारा प्राचीन संस्कृति की धरोहर का प्रयास किया जा रहा है। ऋषि महाराज मंदिर के चारों ओर पत्थरों का परकोटा बनाया जा रहा है। बेश किमती कलाकृतियों को सहज कर उचित स्थान पर लगाया जा रहें है। पुरातत्व विभाग से जुड़े लोगो का मानना है कि इस स्थान को संग्रहित एवं सुरक्षित रखने की ठोस कार्य योजना है, जिसका शीघ्र ही उदय होगा। फि लहाल पत्थरों का प्लेट-फार्म बनाया जा रहा है, एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक पत्थरों का ही मार्ग निर्माण किया जा रहा है।
बैतूल जिले के इतिहास के बारे में जिले की आधी से ज्यादा आबादी को पता नहीं है कि जिले का सबंध किस युग- काल – समय से कब – कब रहा है। जिले में घटित मान्यताओं को लेकर कुछ जानकार एवं इतिहासकार तथा पुरात्तव विभाग के विशेषज्ञ अब इस बात पर भी चिंतन मनन करने में जुट गये है कि मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले का प्राचिन एवं पुरात्तव तथा पौराणिक इतिहास क्या है। बैतूल जिले के काफी प्राचिन इतिहास से सूर्यवंश का रिश्ता भी किस तरह जुडा हुआ है। बैतूल जिले में बहने वाली ताप्ती नदी जिसे आदिगंगा – भद्रा – तापी – तपती – तापती सहित दर्जनो नामो से पुकारा जाता है उसका जन्म स्थान मुलतापी  – मुलताई बैतूल जिले में ही स्थित है। जिले का प्राचिन इतिहास बताने के लिए हम कुछ प्रमाण प्रस्तुत कर रहे है। जिले में रहने वाली जनजातियों का सबंध किसी न किसी युग एवं काल से मिलता -जुलता है। सतयुग के समय विदर्भ की राजकुमारी दमयंती के साथ विवाह के बाद उसके त्याग के बाद जंगलो में भटकने वाले राजा नल ने जिले के मासोद ग्राम के पास स्थित तालाब की मछली को भूनने का प्रयास किया था लेकिन मछली उछल कर तालाब में जा गिरी। इस क्षेत्र में प्रचलित कथाओं में नल – दमयंती के संदर्भ में यह कहा जाता है कि   ऊंचा खेडा पर पटटन गांव , मंगलराजा मोती – दमोती रानी बरूवा बामन कहे कहानी , हमसे कहती उनसे सुनती सोलह बोल की एक कहानी , सुनो  महालक्ष्मी रानी , विदर्भ का यह क्षेत्र जिसे महाभारत में चीचकदरा जो वर्तमान में खिचलदरा कहलाता है इस क्षेत्र का राजा कीचक था जो कि विराट के राजा का साला था । कीचक अखडा का नाम कीचकधरा जो वर्तमान में बैतूल एवं पडोसी राज्य महाराष्ट्र के अमरावती जिले के परतवाडा क्षेत्र से लगा हुआ चीखलदरा कहलाता है। राजा कीचक की कुल देवी वेराट देवी का स्थान बैतूल जिले के प्रभात पटट्न गांव में था जो प्राचिन में परपटटन गांव के रूप में जाना जाता था। महाभारत के पूर्व अज्ञातवास के दौरान में पांचो पाडंव राजा कीचक के राज्य में स्थित सालबर्डी की गुफाओं में भी रहे जो कि अभी भी मौजूद है। पांडव पुत्र जीवन संगनी पर बुरी नज़र रखने के कारण ही पांडव पुत्र भीम ने कीचक को मारा था। बैतूल जिले में त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने ही मां सूर्य पुत्री ताप्ती नदी के किनारे शिवधाम बारहलिंग में बारह शिवलिंगो की स्थापना ताप्ती के तट पर पत्थरो पर भगवान विश्वकर्मा की मदद से की थी जो अभी भी मौजूद है। इस स्थान पर सीता स्न्नानागार भी मौजूद है जहां पर माता सीता ताप्ती के तट पर स्नान करती थी। इस क्षेत्र में वनो में सीताफल पाये जाते है जिनका उल्लेख रामायण में भी है। रामायण की चौपाई में कहा गया है कि माता सीता पुछती है कि प्रभु अति प्रिय फल मोरा तब भगवान ने इसका नाम सीता जी के नाम पर सीताफल दिया था। कुरूवंश के संस्थापक राजा कुरू की माता ताप्ती का बैतूल जिले में जन्मस्थान के कई प्रमाण है जैसे नारद टेकडी , नारद कुण्ड , सूर्य कुण्ड , धर्मकुण्ड , पाप कुण्ड , शनिकुण्ड , सात कुण्ड बैतूल जिले में ताप्ती जन्मस्थली में मौजूद है। बैतूल जिले में आज भी सबसे अधिक शिवलिंग तापती नदी के किनारे है जो कि इस बात के प्रमाण है कि रावण पुत्र मेघनाथ ने तापती के किनारे कठीन तपस्या की थी। यह क्षेत्र रावण के बलाशाली पुत्र मेघनाथ का राज्य का हिस्सा रहा है इसलिए यहां के मूल निवासी आज भी गांवो में मेघनाथ – रावण – कुंभकरण की पूजा करते है। ताप्ती नदी के किनारे देवलघाट नामक स्थान भी है जहां से देवता बीच नदी में स्थित सुरंग से स्वर्ग को प्रस्थान किये थे। इस जिले में चन्द्र पुत्री पूर्णा का भी जन्मस्थान  पुष्पकरणी है जो कि भैसदेही के पास है। बैतूल जिले का प्राचिन इतिहास इस बात को प्रमाणित करता है कि सूर्य एवं चन्द्रवंश की दो देव कन्याओं का इस जिले में उदगम स्थान है तथा इस जिले से ही वे निकल कर भुसावल के पास मिलती है। बैतूल जिले में कई प्राचिन अवशेष भी है जिन्हे आज जरूरत है समझने एवं परखने की ।
मां ताप्ती जागृति मंच जिला बैतूल मां सूर्य पुत्री ताप्ती की महिमा को जन – जन तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। कोई भी जिझासु व्यक्ति कभी भी सम्पर्क कर मिल कर जानकारी प्राप्त कर सकता है। नेट पर भी ताप्ती महिमा के नाम से एवं ताप्ती जी के नाम पर कई कथायें दे चुका है।
सम्पर्क करे
रामकिशोर पंवार
संस्थापक
मां ताप्ती जागृति मंच बैतूल

”ए मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर तुम नाराज न होना ………..!”
रामकिशोर पंवार ”रोंढावाला ”
प्यार -लव -प्रेम – मोहब्बत और न जाने कितने नामो से पहचाने एवं पुकारने जाने वाला यह ढाई अक्षर का शब्द दरअसल में किसी अफसाने – तराने से कम नही है। प्यार जिदंगी में हर किसी को होता और छोड़ता रहता है। अकसर लोग कहते है कि ”ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित हो….! प्यार दरअसल में भूले बिसरे गीतो की तरह होता है जब बजता है तो याद आ जाता है गुजरा जमाना। हर व्यक्ति का अपनी इस मौजूदा जिदंगी में किसी न किसी से प्रेम जरूर होता है। जिसका किसी से प्रेम न हो वह व्यक्ति अनजाने में प्रेम कर बैठता है इस बात का उसे भी अदंाज नहीं होता है। वैसे कोई माने या न माने लेकिन सच तो कड़वा होता है बिलकुल नीम और करेले की तरह जिसको पीने से पहले उसकी गंध ही जी को मचला देती है। दरअसल में होता यह है कि हर किसी को अपने जीवन में कभी न कभी किसी अनजान एवं पहचान के मेल – फिमेल से प्यार – लव हो जाता है। वैसे लव की पूरी परिभाषा की जाये तो उसे भी शार्टकट में लफड़ा वाला या वाली कह सकते है। आजकल लव के चक्कर भी इतने जबरदस्त हो जाते है कि कई बार उसका जुनून किसी भी हद – सीमा को पार कर लेता है। लव के चक्कर में कई लोग निपट गये और कई को लोगो ने निपटा दिया। आजकल कलर्स और कलर टीवी पर कई लव के लफड़े बाज धारावाहिक आ रहे है। लोगो का ऐसा पागलपन लव के लफड़े को गांव की गलियो तक ले जा चुका है। आजकल गांवो में भी हीर – रांझा और लैला मजनू के कलयुगी किस्से सुनने को मिलते है जिसमें धोखेबाजी और चालबाजी देखने को सामने आती है। बैतूल के कुछ समाचार पत्रो में आजकल आन किलिंग का मामला रोज छप रहा है।   विक्रम और बेताल की तरह रोज नये सवालो के साथ इस तरह के किस्से सुनने को मिल रहे है। हाल ही में लव के लफडे के चक्कर में सारनी के एक अधिकारी की उसकी पत्नि ने पोल खोल दी। सारनी थर्मल पावर स्टेशन की राख से गर्म हो चुके अधिकारी ने जब अपनी वासना को ठंडा और शीतल करने के लिए किसी शीतल की जगह चीतल का उपयोग कर लिया तो अधिकारी महोदय की श्रीमति घायल शेरनी की तरह दहाड़ कर उस चीतल पर झपटा मार कर उसे घायल कर दिया। शर्मसार अधिकारी इसे प्यार का तराना तो बता रहा है लेकिन गीदड़ की तरह दुम दबा कर भागे अधिकारी को उसकी बीबी ने इस तरह बेनकाब कर दिया कि बेचारे ने शर्म के मारे घर में ताला लगा कर कुछ दिनो के लिए घर छोड़ कर वन टू का फोर हो जाने में ही अपनी भलाई समझी। अब मीडिया उसे खोज रही है तभी तो रहमान को रहम नहीं आई और उसने अधिकारी को सार्वजनिक पोस्टर बना डाला। आजकल इंसान अपने अंदर छुपे वासना के जानवर को भी प्यार का नाम देकर उसे बदनाम करने में लगा हुआ है। बैतूल जिला मुख्यालय पर आजकल लव के लफड़े में क्या कुछ नहीं हो रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के एक कर्मचारी ने अपने प्यार के लिए उसे कम्प्यूटर्स तक भेट कर दिया। उसके लिए मकान तक विभाग के इंजीनियरो की मदद से बनवाने के बाद भी वह लव के लिए कुछ भी करेगा की स्थिति में है। बैतूल जिले में लव के लफड़े आजकल हर कहीं सुनने को मिलने लगे है अब इन लफड़ो से तो बेचारा जिला पंचायत भी नहीं बच सका है। यहां पर भी लव का पंचायती राज चल रहा है। लव का लफड़ा पुलिस से लेकर प्रेस तक में देखने को मिलता रहता है। लव के लिए कुछ भी करेगा कि स्थिति में शाहपुर का एक थानेदार अपनी बेटी समान बाला को लेकर वन टू का फोर हो चुका है। लव के चक्कर में एक वरिष्ठ समाजसेवी पत्रकार भी बुरी तरह से पीट चुका है। लव के चक्कर में बैतूल जिले में जबदस्त बहार चल रही है। हर किसी पर लव के चक्कर में फागुन की मस्ती छा गई है। लड़के – लड़की भागे रहे है वहां तक तो ठीक है लेकिन अब तो लव के लफड़े में अधेड़ भी गधे के सिंग की तरह गायब होने लगे है। किस्सा अभी कुछ दिन पुराना ही है जिले के एक गांव के सबके प्यारे दादाजी जी पोता – पोती के रहते हुये नौ दो ग्यारह हो गये अब उनका नाम और लोकेशन इसलिए नहीं बता सकते क्योकि कुछ भी कहे भैया मामला ससुरी इज्जत का जो आ गया है। किसी ने ठीक ही कहा है कि प्यार जात – पात नहीं देखता …. प्यार में आदमी अंधा हो जाता है लेकिन यदि कोई अंधा व्यक्ति ही प्यार करके उसकी आंखो में अपनी जीवन की दुनिया देखने लगे तब आप क्या कहेगें…..? इस अवसर पर तो बस यही शायराना अदंाज कुछ इस तरह से गाया जा सकता है कि तराना गाया जा सकता है कि ”तेरी आंखो में डूब जाऊंगा , कोई अंधा न कहे इसलिए चश्मा लगाते रहूंगा…..!  वैसे भी प्यार को लेकर लोगो ने इतना कुछ कहा एवं लिखा तथा गाया है और इसके आगे कुछ कहने को मन नहीं करता लेकिन प्यार के किस्से रोज जो सुनने को मिलते है उसे देख कर चुप रहा भी नहीं जा सकता। प्यार में एकरार और तकरार तो होना स्वभाविक है लेकिन कई बार तो एक तरफा प्यार में एकरार – तकरार के अलावा भी बहुंत कुछ हो जाता है। वैसे मुझे यह कहने या स्वीकार करने में कोई एतराज नहीं कि मुझे भी ज्योति से प्यार हो गया था…..? मैं कितना भी कुछ कहूं इस प्रेम के बारे में लेकिन पाथाखेडा के स्कूल से तो मुझे निकाला ही गया था अपनी कथित प्रेमिका ज्योति को प्रेम पत्र लिखने के चक्कर में…….! हालाकि उस समय मैं प्रेम के सहीं अर्थो को समझ नहीं सका था । आज जब उस बीते पल को याद करता हँू तो मेरे दिल के किसी कोने से आहट आती है कि उस पर कटी बालो वाली कजरारी आंखो से कह दूं कि ”ज्योति आइ लव यू…… हालाकि बरसो पहले के उस कथित प्रेम पत्र को लेकर यह कहना कि ”ए मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर तुम नाराज न होना की तुम मेरी जिदंगी हो की तुम मेरी बदंगी हो …………!  अब इतने दिनो बाद उससे यह कहना कि ”मुझको तुम से प्यार है…….! बेमानी होगा क्योकि अब वह दुसरे की अमानत हो चुकी है। अब जब उसके और मेरे बच्चो के प्रेम करने के दिन आ गये तब मेरा यह कहना न्याय संगत नहीं होगा कि ”तुझे मैं चांद कहता था मगर उसमें भी दाग है, तुझे मैं सूरज कहता था उसमें भी आग है……! मेरा ऐसा कहना दो परिवारो को जला कर राख कर सकता है। अब केवल इतना ही कहा जा सकता है कि ”तुझे गंगा मैं समझुंगा – तुझे जमुना समझुंगा , तू दिल के पास है इतनी है कि तुझे अपना मैं समझुंगा …….! आज भी मेरे तरह ऐसे लाखो – करोड़ो लोग होगें जो कि ”अजीब – प्रेम की गजब कहानी  के शिकार बने हुये है। ऐसे में उससे मेरा यह कहना कि ”ज्योति आई लव यू ……! सही नहीं होगा लेकिन प्रेम के अर्थ कई प्रकार के भी हो सकते है। कोई जरूरी नहीं है कि प्यार का मतलब पति – पत्नि के रूप में ही देखे जाये क्योकि हर किसी की किस्मत में एश्वर्या राय नहीं होती है इसलिए किसी को ललीता पंवार से भी काम चलाना पड़ता है। प्रेम के अर्थ का तब भी गलत अर्थ निकाला है तब – तब प्रेम बदनाम हुआ है।  प्रेम ज़हर भी है और संजीवनी भी लेकिन यह तो पीने वाले की तासीर पर निर्भर करता है कि उसे वह किस रूप में स्वीकार करे। प्रेम के लिए चक्कर में घर तबाह हो चुके है। प्रेम को वफा और बेवफा दोनो प्रकार से देखा एवं परखा जा सकता है। बचपन का प्रेम और वह गुडडा – गुडडी का खेल जवानी के दहलीज तक नये रूप में सामने आता है तब भी कई बार घुट – घुट कर मरना पड़ता है। प्रेम राधा और मीरा की तरह हर कोई नहीं कर सकता है लेकिन प्रेम तो आजकल राखी सावंत की तरह हो गया है जो कि मुन्नी की तरह बदनाम होता चला आ रहा है और न जाने कब तक वह मुन्नी की तरह बदनाम होता रहेगा…….! अंत में चलते – चलते यही कहना चाहता हँू कि ”भरी दुनिया में आखिर दिल को समझाने कहां जाये ……!

जहाँ मत्था ना टेकने पर मंत्रियों के उतर जाते हैं सर से ताज
सारनी बैतूल.(रामकिशोर पंवार) पद पर बैठा व्यक्ति चाहे वह मंत्री हो या संत्री या फिर कंत्री कोई नही चाहेगा कि वह पदमुक्त हो या जाये या उसकी कुर्सी चली जाय। कुर्सी बचाने के लिए लोग क्या कुछ नहीं करते है। अगर मत्था टेकने या सर झुकाने से यदि मंत्री पद बना रहे तो लोग अपना सर हर किसी के सामने उठा कर बात ही नहीं कर सकते है। सारनी के बाबा मठारदेव के बारे में लोगो का ही नही केन्द्र एवं विभिन्न राज्यो तथा इस प्रदेश के मंत्रियो का यही अनुभव रहा है कि सारनी के बाबा मठारदेव के सामने मतस्तक न झुकाने तथा उसकी पहाड़ी के ऊपर से हवाई यात्रा करने वाले कई मंत्री उडन छु हो गये। कई मंत्रियो के लिए अभिश्राप बना सारनी दौरा उनके जीवन की अमीट छाप रहा है। यंू तो हमारे देश में कई चमत्कारी संत महात्मा हुए हैं। सब अपने आप में श्रेष्ठï कहे जाते हैं। सतपुड़ांचल की हरी-भरी वादियों में बसे मठों के मठाधीश बाबा मठार देव के चमत्कार जग जाहिर हैं। बैतूल जिले का प्रमुख औद्योगिक नगर सारनी देश-प्रदेश में सतपुड़ा ताप बिजली घर के रूप में जाना जाता है। यह नगर सतपुड़ा की हरी-भरी वादियों के बीच इटारसी-नागपुर रेल मार्ग के घोड़ाडोंगरी रेल्वे स्टेशन से 18 किमी की दूरी तथा राष्टरीय राजमार्ग की मुख्य सड़क के बरेठा ग्राम से 32 किमी की दूरी पर स्थित है। इस सतपुड़ा की सुरम्य पर्वत माला में 3028 फीट की ऊंचाई पर श्री-श्री 1008 बाबा मठारदेव महाराज का मंदिर बना है। किदवंती कथाओं के अनुसार समूचे मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट के असंख्य श्रद्घालू भक्तों की आस्था के प्रतीक श्री श्री 1008 बाबा मठारदेव ने 300 वर्ष पूर्व इस शिखर पर तप किया था। ऐसी मान्यता है कि तीन शताब्दी पूर्व बरेठा बाबा, बागदेव बाबा तथा मठारदेव बाबा नामक तीन चमत्कारी संत पुरूष भगवान शिव के उपासक के रूप में प्रसिद्घ थे। बाबा मठारदेव के तप बल के प्रताप से ही बीते कई सालों से क्षेत्र के लोगों का जीवन खुशहाल एवं संपन्न है। बाबा की पहाड़ी के नीचे कल-कल कर बहती तवा नदी के किनारे बना सारनी ताप बिजली घर एवं प्रचुर मात्रा में जमीन के गर्भ में छुपी पाथाखेड़ा की 8 कोयला खदानों में से निकलने वाला कोयला बाबा के चमत्कार की देन है। मौजूदा दौर में सारनी ताप बिजली घर में बिजली का विपुल कीर्तिमान उत्पादन और पाथाखेड़ा की खदानों को मिलने वाले पुरूस्कार बाबा के आशिर्वाद का प्रसाद मानते हैं। बाबा के चमत्कार के कारण उनके अनुयायी विभिन्न धर्म, संप्रदाय तथा आचार-विचार के बाद भी बाबा के दरबार में अपनी मुराद के लिए दौड़े चले आते हैं। मनचाही मुराद पूरी होने पर बाबा के स्थान पर बकरे, मुर्गे की बलि देते हैं। बाबा के चमत्कार के बारे में सारनी ताप बिजली घर के कर्मचारी बताते हैं कि बाबा के मंदिर में 1966 में तत्कालिक सतपुड़ा ताप बिजली घर के प्रोजेक्ट आफिसर डीएस तिवारी ने पहली बार बिजली पहुंचाई जो आज तक जल रही है। कहा जाता है कि 1966 से सारनी ताप बिजली घर में दुर्घटनाएं तथा अकाल मौत में कमी आई है। एक बार बाबा के मंदिर में लाईट नहीं जली तो 31 मार्च 83 को 12 लोग जल गए। जिसमें 6 की जीवन लीला समाप्त हो गई। इसी तरह एक बार फिर मंदिर की बिजली गुल हो गई तो 14 लोगों को ले जा रही नाव राजडोह में डूब गई। जिसमें एक भी जीवित नहीं बचा। 93 में बंकर की क्षति के पीछे भी मंदिर का अंधेरा बताया जाता है। लोग शाम होते ही बाबा की लाईट देखकर ताप बिजली घर की तथा आम जन मानस  की खुशहाली की कामना करते हैं। बाबा की इस शिखर माला पर बिजली व्यवस्था के लिए 74 पोल लगाए गए हैं, जिनकी देख-रेख नगरपालिका प्रशासन करता है। श्री १००८ बाबा मठारदेव सारनी
बाबा मठारदेव एक बहुत सिध्ध स्थान है यहाँ पर आने के लिए राजमार्ग ६९ इटारसी से बैतूल के मध्य ग्राम बरेठा से ३३ किलोमीटर की दूरी पर है रेलवे मार्ग के मध्यम से भी बाबा मठारदेव तक पहुँचा जा सकता है घोडाडोंगरी रेलवे स्टेशन से १८ किलोमीटर की दूरी पर बाबा मठारदेव का मन्दिर ३००० फिट की पहाडी पर स्थित है यह मन्दिर चारो और से पहाडियों से घिरा हुआ है तथा एक तरफ़ सारनी नगर और सतपुडा बाँध है यह बात बहुत पुरानी है जब में मध्य प्रदेश विद्युत् मंडल के सतपुडा थर्मल पॉवर स्टेशन का निर्माण हो रहा था कहा जाता है जहाँ पैर सतपुडा थर्मल पॉवर स्टेशन का निर्माण हो रहा था वहां एक बहुत पुराना पीपल का वृक्ष था जिसको निर्माण के लिए काटना था पहली बार जब काटने वाले ने उस पीपल के वृक्ष पैर कुल्हाडी चलायी तो उसमे से रक्त की धर निकलने लगी जिस कारण से उसने वृक्ष नही कटा तत्पश्चात उस वृक्ष को क्रेन से उखाड़ने का प्रयास किया गया परन्तु क्रेन दो बार पलट गई सभी प्रयास निष्फल हो गए पर जब मध्य प्रदेश विद्युत् मंडल ने इनाम की घोषणा की तो एक गरीब व्यक्ति आया और उसने वृक्ष की पूजा कर कहा मुझे मेरी दो लड़कियों की शादी करनी है तत्पश्चात उसने वृक्ष को काटना शुरु किया बिना किस दिक्कत के उसने वृक्ष को काट दिया उस वृक्ष में से मठारदेव बाबा निकले और सतपुडा की पहाडी पर ३००० फिट ऊपर समाधी ले ली बरसो पहले की बात है जब पॉवर स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा था तब यहाँ एक कंपनी के कुछ उत्साही युवको ने पहाड़ के ऊपर जाने का निश्चय किया उन दिनों पहाडी पर जाने का कोई और रास्ता नही था परन्तु अपनी धुन के पक्के युवक साहस के साथ सभी बाधाओ को पर कर शिखर पर पहुच गए वहां पहुचकर उन युवको ने अद्भुत चमत्कार देखा टूटी फूटी घास की मढिया और उसके आस पास झाड़ बहार के साफ़ सफाई हुयी थी मढिया के सामने अखंड धुनी जल रही थी ऐसा आभास हो रहा था यहाँ अभी अभी कोई व्यक्ति आया था जिसने साफ़ सफाई करके शिवलिंग को धोकर ताजे फूल चढाये हो परन्तु पहाड़ की निर्जन चोटी पर सांय सांय चलने वाली हवा के अलावा कुछ भी नही था फिर भी युवको ने सोचा कोई तो होगा जो दोबारा यहाँ जरूर आएगा यह सोचकर सभी वहां ठहर गए लेकिन कोई नही आया नीचे उतारते समय अचानक एक युवक को पत्थर की ठोकर लगी और संतुलन बिगड़ने के कारन वो चट्टानों से टकराता हुआ हजारो फिट गहरी खाई में गिर गया जब उसके दोस्तों ने उसके खोजना शुरु किया तो वह तो वह पहाडी के नीचे बेल के पेड़ के नीचे सो रहा था जब उसने खाई में गिरने की बात सुनाई और कहा मुझे ऐसा लगा मुझे हाथों से पकड़कर किसी ने संभल लिया और पलक झपकते ही पेड़ के नीचे लाकर सुला दिया आखिर हजारो फिट गहरी खाई में गिरा व्यक्ति कैसे जीवित रह सकता है सारनी से दमुआ मार्ग पर बहुत से ट्रक चालको को समय समय पर बाबा मठारदेव ने प्रत्यक्ष या अप्रतक्ष्य रूप से दर्शन दिए है दमुआ के निवासी एक ट्रक चालक ने बताया वो एक दिन मध्य रात्रि सारनी जा रहा था तभी बाबा मठारदेव की पहाडी के नीचे एक बाबा ने उसे रोका लिफ्ट मांगने के लिए पर उसने ट्रक नही रोका आगे थोडी दूर जाकर उसका ट्रक बंदरिया घाट पर पलट गयामई का महिना था तीन युवक पहाडी पर चढ़ते चढ़ते प्यास के व्याकुल हो उठे उनमे इतनी शक्ति भी नही थी की और चल सके तभी एक बुध बाबा मटका लेकर आ रहा दिखाई दिया जब उन्होंने बुढे बाबा को पुकारा तो वो आया और अपने मटके का जल पिलाया तब युवको ने पानी के स्त्रोत के बारे में पुछा बुढा बाबा उन्हें पहाड़ में बनी एक गहरी झील की चट्टान पर ले गया और वहां गीली सी जगह बताई और कहा इसे खोदो इसमे से जल निकलेगा जो बाबा के भक्तो की प्यास बुझायेगा और बाबा पेड़ के नीचे बैठ गया जब तीनो ने खोदा तो चट्टान के नीचे से पानी की फुहार निकल पड़ी और जल नीचे की तरफ़ बहने लगा जब बाबा की तरफ़ उन्होंने देखा तो पेड़ की छाया में बैठे बाबा नही थे कुछ दिनों बाद उस झील से बाबा के मन्दिर तक पाइप लाइन डाल दी गई और पानी की एक विशाल टंकी बनाकर भक्तो के लिए पानी की व्यवस्था की गई ऐसे बहुत सरे अनुभव बाबा मठारदेव के भक्तों से सुने जा सकते है प्रतक्ष्य को प्रमाण की आवश्यकता नही होती बाबा के चमत्कार बहुत लोगो ने देखे है आज भी देख रहे है आज भी सतपुडा की पहाडी में बाबा मठारदेव की जिंदा समाधी मौजूद है सतपुडा थर्मल पॉवर स्टेशन के तत्कालिन मुख्य अभियंता को बाबा मठारदेव ने सपने में दर्शन दिए और आदेश दिया की वो बाबा मठारदेव पहाडी पर बिजली की व्यवथा करे इसके बाद मध्य प्रदेश विद्युत् मंडल ने पहाडी के नीचे से ऊपर तक लाईट की व्यवस्था की जो की रात में जेडनुमा आकृति का निर्माण करती है बाबा मठारदेव की महिमा अपरम्पार है प्रतिवर्ष यहाँ पर १४ जनवरी से दस दिनों के लिए मेले का आयोजन होता है जिसमे लाखो श्रद्धालु बाबा मठारदेव के दर्शन के लिए दूर दूर से आते है
नवनिर्मित बाबा का मन्दिर सभी सुविधाओ से परिपूर्ण है पक्की सीढियाँ, नीचे से ऊपर तक विद्युत् प्रकाश की व्यवस्था तथा प्राकर्तिक पड़ी से निकलने वाले शुध्ध जल की व्यवस्था की गई है कुछ भक्तो द्वारा यहाँ पर नीचे शिव, गणेश एवं हनुमान जी के मन्दिर बनवाए गए है बाबा मठारदेव को शिव का रूप माना गया है यहाँ पर लोगो की सभी मुरादें पुरी होती है इसलिए हर वर्ष यहाँ पर लाखो श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है बाबा मठारदेव सारनी का दौरा लगते है तथा श्रधालुओं को अप्रतक्ष्य रूप से दर्शन देते है सतपुरा थर्मल पॉवर प्लांट जिसकी डेट बहुत वर्षो पूर्व एक्सपायर हो चुकी है परन्तु बाबा मठारदेव की कृपा से आज भी विद्युत् का उत्पादन कर रहा है सारनी के आसपास बहुत सी कोयला खदानें है जो आज भी सफलतापूर्वक उत्पादन कर रही है सारनी के चमत्कारी बाबा देव की हरी-भरी सुरम्य मनोहरी वादियों में बसे श्री श्री 1008 बाबा मठारदेव के बारे में कहा जाता है कि इस दिव्य पुरूष ने अपने चमत्कार के सामने भारत शासन तथा राज्य शासन के अनेक मंत्रियों को अपना भक्त बना रखा है। जिस भी मंत्री ने बाबा के दरबार में हाजरी नहीं लगाई वे यहां से जाने के बाद अपना पद गवा चुके हैं। इस बात को प्रमाणित करती लंबी चौड़ी लिस्ट बाबा के चाहने वालों के पास रहती है। बाबा के सामने बाबूलाल गौर एक बार और भी नतमस्तक न होने का अभिश्राप भो चुके है।

बॉक्स में
जिनके सर से उतरे ताज
प्रमुख नेताओं में प्रधानमंत्री स्वर्गीय मोरारजी भाई देसाई, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों में पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र, अर्जुन सिंह, श्यामाचरण शुक्ल, कैलाश जोशी, सुंदरलाल पटवा, वीरेन्द्र कुमार सखलेचा, प्रकाश चंद्र सेठी, केन्द्रीय मंत्रियों में गार्गीशंकर मिश्र, आरीफ बेग, गनी खान चौधरी, नरेन्द्र कुमार साल्वे, राजेश पायलट, केसी पंत, कमलनाथ, पड़ोसी राज्य बिहार के राज्यमंत्री राजेन्द्र प्रारद यादव, मध्यप्रदेश शासन के राज्यमंत्रियों में स्व. रामजी महाजन, झुम्मकलाल भेडिया, विजयकुमार पाटनी, डाक्टर भवरसिंह पोर्ते, चनेशराम राठिया सहित दर्जन से भी अधिक मंत्रियों को हटना पड़ा। स्व. इंदिरा गांधी को जब सारनी के बाबा मठारदेव के बारे में पता चला तो वे सारनी का अपना दौरा रद्द कर अमरकंटक से वापस चली गई।
इति,

” भैया जी मर गये हो या हो जिंदा कुछ तो संकेत दीजिए ……! ”
लेख –  रामकिशोर पंवार ”रोंढ़ावाला ”
मां की महिमा शब्दो में बयां नहीं की जा सकती. मां के प्रकार कई है. जगत मां से लेकर धाई मां तक के बारे में हम पुराणो एवं इतिहास के पन्नो तक में किस्से कहानियां पढ़ते चले आ रहे है. जननी से बड़ी होती है जीवन दायनी मां क्योकि उसका त्याग उस मां के कोख के 9 माह के दर्द से ज्यादा होता है. जब बात श्रीकृष्ण के सामने आई कि ”वह आखिर लाल किसका है………! यशोदा का या फिर देवकी का ……!”  जग के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु ने उक्त सवाल का ऐसा जवाब प्रस्तुत किया कि मां यशोदा को यह पीड़ा ही नहीं हुई कि श्री कृष्ण ने उसकी कोख से जन्म ही नहीं लिया. श्री कृष्ण ने व्याकुल यशोदा को कहा कि ”मां लोग कुछ भी कहे लेकिन सारा संसार मुझे यशोदा तथा नंदबाबा के नाम से नंदलाला के नाम से ही जाना – पहचाना जायेगा….!”   भगवान श्री कृष्ण कहते है कि ”हे मां जननी से बड़ी होती है पालनहारी , इसलिए किसी भी प्रकार का विलाप न कर मां ….. तेरा दर्जा कोई दुसरा नहीं ले पायेगा….!” आज भी इस संसार में ऐसे कई उदाहरण बताये जा सकते है जिसमें कोख जननी से महान कहलाई है उसकी पालनहारी …… चाहे वह बात पन्ना धाई मां की हो या फिर रानी लक्ष्मी बाई की जिसने त्याग और ममता की ऐसी मिसाल पेश की है कि आज भी बरसो बीत जाने के बाद लोग उनके नाम के सामने नतमस्तक है. बैतूल जिले में भी संसाद की तरह नदियो को मां की तरह पूजा जाता रहा है. स्वच्छ – निर्मल – पावन जल का भण्डार देने वाली नदियां हमारी संस्कृति का मुख्य अंग है.विश्व की कई संस्कृति एवं सभ्यता नदियो के किनारे जन्मी और उसी के किनारे समाप्त हो गई. जब संसार की उस मालिक ने रचना की थी तब बात चली होगी जल – वायु की ऐसे में नदियो को भी पवन के साथ धरती और आकाश में अवतरीत किया होगा. ताप्ती के बारे में पुराणो में तो यही लिखा है कि भगवान सूर्य नारायण ने स्वंय के ताप से लोगो को मुक्ति दिलाने के लिए सबसे पहले ताप्ती को ही अवतरीत किया था इसलिए ताप्ती आदिगंगा भी कहलाई जाती है. आज इस नदी के धरती पर अवतरण के लाखो – करोड़ो साल बीत चुके है. इस नदी के किनारे कितने ही शहर – गांव और बस्ती बसी और मिट गई और नहीं मिटा तो सिर्फ इसका अस्तीत्व जो आज भी कायम है. सूर्य पुत्री कहलाने वाले मां ताप्ती को लेकर इस जिले के हर व्यक्ति में वही श्रद्धा के भाव है जो गंगा और यमुना तथा सरस्वती के प्रति है. कुछ महत्वाकांक्षी लोगो और लालची स्वभाव के पंडितो तथा महापात्रो ने गंगा को    महिमा मंडित किया जो कोसो दूर है. गंगा में पिण्डदान के बहाने लोगो को ठगने के गोरखधंधे तथा ताप्ती के महत्व को कम आकने के चलते इस जिले की वह नदी आज अपनो के बीच बेगानी हो गई जिसमें मात्र मृत आत्मा को तीन दिन में मुक्ति मिल जाती है. गंगा में प्रतिदिन हजारो अस्थियां लेकर पहुंचते परिजन सोचते होगें कि उसके द्धारा की गई अस्थी विसर्जन से उसके परिजन को मुक्ति मिल गई लेकिन लाखो – करोड़ो की संख्या में अस्थियो का दलदल बनी गंगा में डुबकी लगाने के बाद आपकी अंजुली में यदि किसी की अस्थी न आ जाये तो कहना…… यह कडुवा सच है लेकिन लोग ताप्ती को छोड़ नर्मदा को लांध कर अपने परिजनो की अस्थियां गंगा में लाकर बहा जाते है. साल में वहीं गंगा एक बार पूरी अस्थियों को लेकर मां नर्मदा के पास आकर उन्हे सौप कर उनकी मुक्ति की प्रार्थना करती है. इन सबसे हट कर मां ताप्ती तो किसी भी मृत देह के अंतिम संस्कार के तीसरे दिन ही उसे मुक्ति का सीधा रास्ता दिखा देती है.
मां  ताप्ती की महिमा के बाद मैं अपने मूल विषय पर आता हँू . लोग कहते है कि ”इसान की आत्मा जिंदा होती है …….! जिनकी आत्मा जिंदा होती है वही व्यक्ति पुण्य के काम करता है…..!” मुझे पिछले कई दिनो से ऐसा क्यूं लग रहा है कि ”हमारे जिले के भैया जी की आत्मा भी मर चुकी है…….! यदि हमारे भैया जी की आत्मा आज जिंदा होती तो क्या वे इस बात का बर्दास्त कर पाते कि ”उनके सरकार में रहते उनके ही जिले की पुण्य सलिला मां ताप्ती का नाम और महिमा का गान राज्य सरकार ने क्यों नहीं किया….! भैया जी तो इस बारे में आज तक किसी से कुछ बोले तक ही नहीं क्योकि आपको अंदर की बात शायद पता नहीं कि ”हमारे भैया जी को पता ही नहीं कि कोई गान – वान भी बना है या लिखा गया है…..! यह बात अलग है कि हमारे भैया जी किसी के फटे – पुराने में अपनी टांग नहीं डालते जिसके पीछे अंदर की बात कुछ और भी हो सकती है. ऐसा नहीं कि हमारे भैया जी बैतूल के ही है हमारे भैया जी तो हर उस गांव में है जिसके वे चौधरी बने हुये है. भैया जी हमारे हो या तुम्हारे लेकिन माई तो सबकी है न ऐसे में भी यदि भैया जी की आत्मा ही मर जाये तो फिर आप और हम आखिर क्या कर सकते …..! कुछ उन्नीस – बीस हो गया तो भैया जी को जिंदा करने में साल लग जायेगें तब तक को भैया जी के साले साहब वो धुलाई करेगें कि वाशिंग मशीन भी नहीं कर पायेगी….! अब इससे बड़ी शर्मनाक बात और सामने आई है. प्रदेश की सरकार पड़ौसी महाराष्ट्र सरकार के साथ मिल कर ताप्ती विकास प्राधिकरण बनाने जा रही है. अब ताप्ती विकास प्राधिकरण का मुख्यालय रहेगा वह बुराहनपुर शहर जहां से स्कूली शिक्षा मंत्री श्रीमति अर्चना चिटनीस प्रतिनिधित्व करती है. ताप्ती विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष पद से लेकर सारा लाभांश मैडम चिटनीस और पड़ौसी महाराष्ट्र के लोगो को मिलेगा. काश यदि हमारे भैया जी की आत्मा जिंदा होती तो हम गांव – गांव से भैया जी को शहर और जिला मुख्यालय से दिल्ली तक भिजवा कर इस बात का शोर मचाते कि ”हम अपनी मां के आंचल का दुध किसी और को इसलिए नहीं पीने देगें क्योकि हमारे कंठ अभी प्यासे है…..! हम भुख और प्यास से व्याकुल रहना नही चाहते इसलिए हम पहले शांती का पाठ पढाना चाहते है. पूज्य बापू जी और महान संत गुरू नानक देव भी मां ताप्ती के तट पर वही शांती और सदभावना का संदेश दे चुके है. इन सबको हमारी कमजोरी न समझे क्योकि मां ताप्ती के पावन तट पर गोरे अग्रेंजो की नाक में नकेल डालने वाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तात्या टोपे भी आ चुके है. हम चुप है तो सिर्फ इस बात के लिए कि हमारे गांव से लेकर शहर और जिले के चौधरी बने भैया जी की एक बार मरी आत्मा में जान आ जाये. लोग रावण की ममी को आज भी श्री लंका की उस अनजान पहाड़ी पर छुपा कर रखे है कि उसमें किसी भी तरह से जान आ जाये लेकिन अभी तो हमारे भैया जी ममी नहीं बने है. इस लेख के पीछे छिपी भावना के दर्द को भैया जी यदि समझ कर अपनी आत्मा को स्वंय के आत्मबल पर यदि जिंदा कर लेते है तो इस जिले का भलां हो सकता है. वैसे तो भैया की आत्मा को जगाने के दस तरीके है लेकिन वे सब ओछे एवं घटिया दर्जे के है जो हमारी संस्कृति के विपरीत है. हम तो बस यही चाहते है कि ”भैया जी की आत्मा जिंदा हो जाये ताकि उनके बहाने हम अपनी मां ताप्ती को वह मान सम्मान दिलवा सके जो आज डाकुओ की शरण स्थली चम्बल को मिल रहा है….! भैया जी को आखिर में चलते – चलते एक ही सुझाव है कि वे राम तेरी गंगा मैली का वह गाना जरूर याद रखे जिसमें यह कहा गया है कि ”देर न हो जाये कहीं देर न हो जाये ……!

बैतूल जिले में आधा दर्जन टुयूबवेलो से अविरल बह रही
जलधारा को रोकने के लिए किसी की भी रूचि नहीं
बैतूल  (रामकिशोर पंवार )  बैतूल जिले में इस समय आधा दर्जन  टुयूबवेलो से अविरल बह रही जलधारा को रोक कर उसके उपयोग करने में जिला प्रशासन कोई ठोस कारगर कदम नहीं उठा सका है.  जिले के पोहर ग्राम पंचायत क्षेत्र में एक नहीं बल्कि दो टुयूबवेलो से बह रही जलधारा को यदि प्रशासन समय रहते रोक पाता तो पोहर सहित आसपास की दर्जनो ग्राम पंचायतो की सुरसा की तरह मँुह फाड़े खड़ी समस्या से छुटकारा मिल जाता . जिलें मे इस समय विगत 25 वर्षो से जल उगल रहे ग्राम चोपनीखुर्द के टुयूबवेल से प्रतिदिन बिना बिजली और मोटर के 30 सेकेण्ड में 2 सौ लीटर पानी को फेका जा रहा है. मात्र 60 से 70 फीट की खुदाई पर वन ग्राम थावडी के समीप एक , पोहर में दो , चोपनीखुर्द में एक तथा दो अन्य स्थानो पर खोदे गये टुयूबवेलो से बह रही जलधारा को यदि समय जिला प्रशासन रोक पाता तो तीसरे विश्व युद्ध के प्रकोप से बैतूल जिले को बचाया जा सकता था. बैतूल जिले की मुलताई एवं भैसदेही तहसीलो के जिन गांवो में पानी की अविरल धारा प्रकृति द्धारा बिना बिजली और मोटर के बहाई जा रही है उसे ताप्ती – पूर्णा नदी में नदी नालो के माध्यम से भी यदि परिवर्तित कर दिया जाता तो गर्मी में इन नदियो की बहती जलधारा हजारो कंठो की प्यास का बुझा पाती. जल संरक्षण के नाम पर केन्द्र एवं राज्य सरकार के मद से विगत  एक दशक मे जितना पैसा जिला प्रशासन अपने अधिनस्थ विभागो से खर्च कर चुका उससे मिली सफलता का प्रतिशत निकाला जाये तो यह नतीजा सामने आता है कि अकेले चोपनी खुर्द के टुयूबवेल ने प्रतिदिन 14 हजार 4 सौ लोगो के लिए उपयोगी जल को प्रतिदिन बाहर फेकता है. इस टुयूबवेल से 24 हजार लीटर की जल निकासी होती है . बैतूल जिला प्रशासन इन बीते एक दशक में 24 हजार प्रति लीटर जल को संरक्षित कर लेता तो भी वह दस सालो में शासन द्धारा खर्च राशी से चार गुणा अधिक जल जल संरक्षित होता. अब सवाल यह उठता है कि जिस जिले में ताप्ती सरोवरो एवं जल सरंक्षण के नाम पर स्टाप डेमो के निमार्ण पर लाखो रूपैया पानी की तरह बहाया वह किस काम का जब हम बहते हुये पानी को ही नहीं रोक पाये. प्रति व्यक्ति को औस्तन 40 लीटर जल की जरूरत पड़ती है ऐसे में जिले के उन टुयूबवेलो से बहने वाले जल से कितने व्यक्तियो की जरूरत पूरी हो सकती थी जिसे गर्मी में एक लीटर भी जल के लिए लाले पड़ जाते है.  आज यही कारण है कि जिले में चार दर्जन पहाड़ी एवं मैदानी ऐसी नदियां है जिन पर बांध बनाया जा सकता था लेकिन इस जिले का पानी ताप्ती के माध्यम से गुजरात पहुँच जाता है और ताप्ती पूरे गुजरात की जीवन रेखा बनी हुई है. इसी तरह वर्धा का पानी महानदी होता हुआ अरब सागर में मिल जाता है. जिले का पानी दो अलग – अलग सागरो में तो मिल रहा है लेकिन जिले का पानी जिले के लोगो के लिए किसी भी काम का नहीं क्योकि बहाने बाज अफसरो के चलते ताप्ती नदी का पानी चंदोरा के अलावा कहीं पर भी रोका नहीं जा सका है.

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नाम :- रामकिशोर पंवार पिता का नाम :- श्री दयाराम पंवार जन्म तारिख:- २३ मई १९६४ ग्राम रोंढ़ा जिला तह. बैतूल मध्यप्रदेश 460001 शिक्षा :- बी.ए. द्घितिय वर्ष सम्प्रति :- स्वंतत्र लेखन पत्रकारिता एंव समाचार पत्र प्रकाशन , संपादन अध्यक्ष :- लेखक मित्र संघ उपाध्यक्ष :- जिला प्रेस क्लब बैतूल संस्थापक :- बैतूल जिला नवयुवक पंवार समाज जाग्रति मंच संस्थापक :- रोहिणी जिला संयोजक :- बैतूल जिला पर्यावरण संरक्षण समिति पूर्व सदस्य :- बैतूल जिला पर्यावरण वाहिणी केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार द्घारा गठित एंव मध्यप्रदेश सरकार द्घारा संचालित -: पत्रकारिता के क्षेत्र में सहभागिता:- १९७८ से नियमित रूप से प्रादेशिक एवं विदर्भ के हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में पत्र लेखन १९८० से १९८३ तक पाथाखेड़ा में साप्ताहिक प्रभात किरण इन्दौर के संवाददाता के रूप में १९८० से १९८९ तक विदर्भ के दैनिक युगधर्म नागपुर के पाथाखेड़ा संवाददाता के रूप में १९८२ से १९८५ तक दैनिक स्वदेश भोपाल एवं ग्वालियर के लिए १९८३ से १९८५ तक दैनिक भास्कर भोपाल, जबलपुर, इन्दौर, के लिए १९८५ से १९८७ तक दैनिक जागरण भोपाल के लिए १९८८ से १९९० तक नवभारत नागपुर के लिए १९८६ से १९८७ तक नागपुर टाइम्स आंग्ल दैनिक के लिए १९८९ से १९९१ तक हितवाद नागपुर १९९२ से १९९३ तक दैनिक नवभारत भोपाल,२००० से आज तक मासिक विजन टूडे के मध्यप्रदेश एवं छत्तिसगढ़ ब्यूरो के रूप में कार्यरत १९९८ से २००४ तक मासिक मधुर कथाए दिल्ली बैतूल प्रतिनिधी के रूप में कार्यरत १९९८ से २००२ तक मासिक सच्ची दुनिया दिल्ली के लिए बैतूल प्रतिनिधी के रूप में कार्यरत १९९० से २००४ तक दैनिक फिर नई राह भोपाल दैनिक अफकार भोपाल ,रा.साप्ताहिक पंचड दिल्ली, दैनिक देशबंधु भोपाल, मासिक कर्मयुद्घ इन्दौर, मासिक धर्मयुद्घ इन्दौर, साप्ताहिक मन की चाल इन्दौर, हिन्दी साप्ताहिक दिलेर समाचार दिल्ली, दैनिक आलोक भोपाल, दैनिक एक्सप्रेस न्यूज भोपाल,एक्सप्रेस मिडिया सर्विस भोपाल, साइना न्यूज एजेन्सी भोपाल, साप्ताहिक पहले पहल भोपाल, साप्ताहिक विज्ञापन की दुनिया नागपुर,१९८० से इन पंक्तियो के लिखे जाने तक हिन्दी मासिक कादिम्बनी दिल्ली, मासिक नवनीत मुम्बई , दिल्ली प्रेस प्रकाशन की पत्रिकाए सरस सलिल, गृहशोभा, चंपक, मुक्ता, सरिता,फोर्थ डाइमेंशन मीडिया प्रा.लि. नई दिल्ली की पाक्षिक पत्रिका फोर्थ डी विचार सारांशहिन्दी पाक्षिक आऊटलुक दिल्ली हिन्दी पाक्षिक सिनीयर इंडिया दिल्ली मित्र प्रकाशन इलाहबाद की सत्यकथा एवं मनोरमा, नई सदी प्रकाशन की मघुर कथाए, क्राइम एण्ड डिक्टेटीव, दिल्ली, दैनिक जागरण की सत्यकथा भोपाल, मासिक मनोनित कहानियाँ दिल्ली, मासिक कंरट दिल्ली, मासिक विजन टूडे दिल्ली, मासिक नूतन कहानियाँ , सच्ची कहानिया , कुसुम परख इलाहबाद, मासिक मेरी सहेली मुम्बई, मासिक अपराध साहित्य की सुपर टाप स्टोरी दिल्ली मासिक सच्चे किस्से, दिल्ली मासिक आलोक सत्यकथाए भोपाल, मासिक गृहलक्ष्मी दिल्ली, मासिक डायमंड सचित्र सत्यकथा दिल्ली, मासिक सच्ची दुनिया, दिल्ली मासिक अपराध कथाए दिल्ली, मासिक माधुरी मुम्बई सहित देश की कई ख्याती प्राप्त पत्र पत्रिकाओं में नियमीत आलेख , रिर्पोटार्ज तथा सकैड़ो कहानियां अब तक प्रकाशित हो चुकी है.वर्तमान समय में बैतूल जिले से एक पाक्षिक , एक साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन रा.हिन्दी दैनिक पंजाब केसरी दिल्ली के प्रतिनिधी के रूप में कार्य अपराध जगत की सत्यकथाए , समय सामायिक लेख यू एफ टी न्यूज डाट काम के बारे में कुछ :- मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले का पहला अतंराष्ट्रीय वेब न्यूज एवं व्यू चैनल यू एफ टी न्यूज डाट काम पर बैतूल जिले के वरिष्ष्ठ पत्रकार एवं लेखक रामकिशोर पंवार द्वारा संचालित एवं संपादित इस बेव पोर्टल पर रामकिशोर पंवार की पत्रकारिता एवं लेखन के 27 वर्षो का लेखा - जोखा तो होगा ही साथ ही उनके संपादन एवं निर्देशन में बैतूल जिले की ही नहीं प्रादेशिक - राष्ट्रीय - अंतराष्ट्रीय खबरो के अलावा कई महत्वपूर्ण समाचारो के वीडियो फूटेज भी रहेगें। जिले की यह एक मात्र पहली बेव पोर्टल न्यूज एवं व्यू सर्विस रहेगी जो पाठको के आलवा देश - विदेश के समाचार पत्रो एवं पत्रिकाओ के साथ - साथ न्यूज एजेंसियों को भी न्यूज एण्ड व्यू भेजा करेगी। सूर्यपुत्री मां ताप्ती को समर्पित बैतूल जिले के इस पहले बेव पोर्टल रामकिशोर पंवार द्वारा संचालित एवं निर्देशित इस बेव चैनल पर रामकिशोर पंवार की रहस्यमय सत्यकथायें , कहानियां , लेख एवं अब तक के सर्वश्रेष्ठ समाचारो एवं आलेखो की सचित्र रिर्पोटो को भी स्थान दिया जा रहा है। इस बेव चैनल के द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर संवाददाताओं , कैमरामेनो , का नेटवर्क स्थापित किया जायेगा। जनता एवं शासन के बीच मध्यस्थता करने में सहायक सिद्ध होने वाले बैतूल जिले के एक मात्र बेव पोर्टल पर देश - प्रदेश - जिले के समाचार पत्रो को भी सीधे जोड़ा जायेगा। हिन्दी के अलावा अग्रेंजी में भी इस वेब पोर्टल पर खबरो का अच्छा खासा ढांचा तैयार किया जायेगा। उक्त जानकारी देते हुये बेव पोर्टल के डायरेक्टर बज्रकिशोर पंवार डब्बू ने बताया कि आदिवासी कला संस्कृति एवं सूर्यपुत्री मां ताप्ती महिमा से ओतप्रोत इस बेव चैनल पर गांव - शहर - जिला - प्रदेश - देश - दुनिया दिन की भी खबरो के भी फूटेज एवं समाचार एक साथ देखने एवं पढऩे को मिल जायेगें । सम्पर्क सूत्र रामकिशोर पंवार बैतूल संवाददाता दैनिक पंजाब केसरी दिल्ली रामकिशोर पंवार सी ओ यू एफ टी न्यूज डाट काम खंजनपुर बैतूल मध्यप्रदेश मो. 91- 9993162080 91-9406535572 , 07141 236122
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